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मायानगरी में संघर्ष भरा रहा इस अभिनेता का सफर जानिए कहानी उन्हीं की जुबानी

रमेश गोयल

फिल्मी दुनिया की चमक-दमक के पीछे एक सच्चाई छिपी होती है – संघर्ष, भूख, निराशा और अदम्य जज़्बे की कहानी। ऐसी ही प्रेरणादायक दास्तान है अभिनेता रमेश गोयल की, जिन्होंने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया। आज वे बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री में एक जाना-पहचाना चेहरा हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुँचने का रास्ता आसान नहीं था।

फतेहपुर सीकरी के गुड़ मंडी निवासी रमेश गोयल का आगरा से गहरा नाता है। उन्होंने अब तक करीब 125 फिल्मों और 50 से अधिक टीवी सीरियलों में अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीता है। चाहे खलनायक का किरदार हो या हास्य, पुलिसवाला या आम आदमी रमेश गोयल ने हर भूमिका को जीवंत बना दिया।

उनकी जिंदगी का अहम मोड़ आया 1999 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘सरफरोश’ से, जिसमें उन्होंने आमिर खान के साथ हवलदार कदम की भूमिका निभाई। यह किरदार उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। रमेश बताते हैं कि आमिर खान ने कई बार अपने संवाद उन्हें दे दिए, जिससे उनका रोल और मजबूत बन गया। इसी फिल्म से उन्हें सिनेमा जगत में असली पहचान मिली।

लेकिन इस पहचान तक पहुँचने से पहले उनका संघर्ष असाधारण था। 1973 में रमेश गोयल ने फिल्मों का सपना लेकर अकेले मुंबई का रुख किया। जेब में पैसे नहीं थे, न कोई जान-पहचान। कई रातें स्टेशन और फुटपाथों पर भूखे-प्यासे गुजारनी पड़ीं। कई बार दरवाज़े बंद हुए, कई बार अपमान सहना पड़ा। पर उनका हौसला नहीं टूटा। वे कहते हैं “फतेहपुर सीकरी से यह सोचकर निकला था कि जीना यहीं है, मरना यहीं है।”

आख़िरकार 1974 में फिल्म ‘जानेमन’ में देव आनंद और हेमा मालिनी के साथ पहला रोल मिला। भले ही पहचान नहीं बनी, लेकिन वह उनके सफर की पहली सीढ़ी थी। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और आज रमेश गोयल इंडस्ट्री में एक सम्मानित नाम हैं।

वर्तमान में वे ‘सावधान’ और ‘नंबर गेम’ जैसी फिल्मों में नजर आने वाले हैं। हाल ही में वे थाईलैंड में बंगाली फिल्म ‘जैस’ की शूटिंग कर लौटे हैं। अपने संघर्ष और समर्पण से रमेश गोयल आज युवाओं के लिए मिसाल बन चुके हैं कि अगर जुनून सच्चा हो, तो मायानगरी भी झुक जाती है।

लेखक संपादक राहुल कुमार शुक्ला

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