
बॉलीवुड के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी भी हैं जो अपनी रिलीज़ के समय दर्शकों का दिल नहीं जीत पातीं, लेकिन वक्त बीतने के साथ उनकी चमक बढ़ती जाती है। ऐसी ही एक फिल्म है 45 साल पुरानी वह कहानी, जो बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हुई थी, लेकिन आज उसे कल्ट क्लासिक का दर्जा मिला हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म में तीन-तीन हीरो होने के बावजूद, सबसे ज्यादा चमक अकेले खलनायक ने बटोरी थी। उसकी अदाकारी ऐसी थी कि हीरो का ग्लैमर फीका पड़ गया और आज फिल्म का असली जिक्र उसी किरदार के जरिए याद किया जाता है।
फिल्म रिलीज़ के समय क्यों हुई फ्लॉप?
फिल्म के पास बड़ा स्टारकास्ट, दमदार कहानी और शानदार संगीत था, लेकिन 70 के दशक के अंतिम दौर में दर्शक मसाला मनोरंजन अधिक पसंद करते थे। यह फिल्म अपनी गंभीर टोन और अलग तरह की कथा शैली के कारण दर्शकों को कनेक्ट नहीं करा पाई। नतीजा—बॉक्स ऑफिस पर फिल्म असफल साबित हुई।

खलनायक जिसने शो चुरा लिया
इस फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण उसका विलेन था। तीखे संवाद, दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और एक अलग किस्म की निगेटिव शेड—उसने दर्शकों को हिलाकर रख दिया।
- तीनों हीरो जहां अपनी-अपनी जगह कहानी में फिट थे,
- वहीं खलनायक ने हर सीन में ऐसी पकड़ बनाई कि उसके सामने बाकी किरदार फीके पड़ गए।
उसके डायलॉग आज भी सोशल मीडिया मीम्स और फिल्मी चर्चाओं का हिस्सा हैं।
45 साल बाद मिली नई पहचान
दशकों बाद जब टीवी और ओटीटी के दौर में क्लासिक फिल्मों को दोबारा देखने की आदत बढ़ी, तब लोग इस फिल्म के गहरे अर्थ और बेहतरीन निर्माण को समझ पाए।
- फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर
- सिनेमैटोग्राफी
- और खलनायक का यादगार प्रदर्शन
इन सबने मिलकर इसे कल्ट स्टेटस दिलाया।
आज क्यों है फैंस की फेवरेट?
- कहानी का अनोखा ट्रीटमेंट
- विलेन का प्रभावशाली किरदार
- उस दौर की बोल्ड फिल्ममेकिंग
इन कारणों ने इसे नई पीढ़ी में भी लोकप्रिय बना दिया है।
निष्कर्ष
एक वक्त था जब यह फिल्म थिएटर्स में खाली सीटों के साथ चली थी, लेकिन आज इसे हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में गिना जाता है जिन्हें समय ने महान बनाया। और इसका सबसे बड़ा कारण है—वह अकेला खलनायक, जिसने हीरो की पूरी चमक पर भारी पड़कर स्क्रीन पर अमिट छाप छोड़ी।
