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ऋषि कपूर को याद कर इमोशनल हुए रणबीर कपूर, बोले– “ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब पापा याद न आते हों”

बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर ने एक हालिया कार्यक्रम में अपने पिता ऋषि कपूर को याद करते हुए भावुक कर देने वाली बातें कहीं। अपने शानदार अभिनय और विनम्र स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले रणबीर ने कहा कि भले ही उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी आज भी उनके दिल और काम में महसूस होती है।

मुंबई में आयोजित एक फिल्म प्रमोशन इवेंट के दौरान जब पत्रकारों ने रणबीर से उनके पिता की कोई यादगार बात पूछी, तो वे कुछ पल के लिए रुक गए। आंखों में नमी लिए रणबीर बोले, “ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब मैं पापा को याद न करता हूं। वो मेरे जीवन के सबसे बड़े प्रेरणास्त्रोत थे। उनकी डांट भी प्यार भरी होती थी, और उनका गुस्सा भी मुझे आगे बढ़ने की ताकत देता था।”

ऋषि कपूर का निधन 30 अप्रैल 2020 को हुआ था, लेकिन उनके चाहने वालों और परिवार के लिए वह आज भी जिंदा हैं। रणबीर ने आगे कहा, “जब भी किसी सीन के लिए कैमरे के सामने खड़ा होता हूं, तो ऐसा लगता है जैसे पापा वहीं कहीं खड़े होकर देख रहे हों। उनकी आवाज अब भी कानों में गूंजती है – ‘एक्सप्रेशन में सच्चाई रखो, ओवरएक्ट मत करो।’”

रणबीर ने बताया कि उनके पिता हमेशा चाहते थे कि वह अपनी पहचान खुद बनाएं, न कि केवल कपूर खानदान के वारिस के रूप में। उन्होंने कहा, “पापा ने कभी आसान रास्ता नहीं दिखाया। वे चाहते थे कि मैं अपनी गलतियों से सीखूं। आज अगर लोग मुझे एक अच्छा अभिनेता मानते हैं, तो उसमें उनका सबसे बड़ा योगदान है।”

इवेंट के दौरान मौजूद दर्शकों ने रणबीर की बातों पर तालियां बजाईं, जबकि खुद रणबीर कुछ देर के लिए भावुक होकर चुप हो गए। उन्होंने बताया कि अपनी आने वाली फिल्म ‘दिल की कहानी’ को उन्होंने अपने पिता को समर्पित किया है। उनके अनुसार, यह फिल्म उस रिश्ते को दर्शाती है जहां पिता और बेटे के बीच भावनाओं का संघर्ष और गहरा प्यार दोनों मौजूद होते हैं।

रणबीर ने यह भी कहा कि वे अक्सर ऋषि कपूर की पुरानी फिल्में देखते हैं और उनके अभिनय से आज भी प्रेरणा लेते हैं। “जब मैं ‘बॉबी’, ‘चांदनी’ या ‘कर्ज़’ देखता हूं, तो समझ आता है कि उन्होंने अपने समय में कितना नया प्रयोग किया था। मैं उनके जैसा तो नहीं बन सकता, लेकिन कोशिश जरूर करता हूं कि वो मुझ पर गर्व करें।”

कार्यक्रम के अंत में रणबीर ने कहा, “पापा ने सिखाया कि जिंदगी में सच्चा बनना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है। वो भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका प्यार और सीख हर कदम पर साथ है।”

रणबीर की यह भावनात्मक यादें सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। यह लम्हा एक बार फिर साबित कर गया कि पिता और बेटे का रिश्ता सिर्फ खून का नहीं, बल्कि आत्मा का बंधन होता है—जो मौत के बाद भी कभी खत्म नहीं होता। by shruti kumari

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