
मुंबई में रविवार रात आयोजित हुए फिल्मफेयर अवॉर्ड्स 2025 ने बॉलीवुड के सितारों से सजी शाम को यादगार बना दिया। इस बार का अवॉर्ड समारोह कई मायनों में खास रहा—क्योंकि 25 साल बाद अभिषेक बच्चन ने अपने करियर का सबसे बड़ा अवॉर्ड अपने नाम किया। वहीं, कास्टिंग और कहानी के दम पर छाई रही फिल्म ‘लापता लेडीज’ ने इस साल के अधिकतर अवॉर्ड्स अपने नाम कर लिए।
फिल्मफेयर की इस चमकदार शाम में फिल्म इंडस्ट्री के लगभग सभी बड़े सितारे शामिल हुए। रेड कार्पेट पर दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, आलिया भट्ट, वरुण धवन, कृति सेनन, और अनन्या पांडे जैसे स्टार्स ने अपने लुक्स से सबका दिल जीत लिया। लेकिन रात की असली चर्चा उस वक्त हुई जब बेस्ट एक्टर की ट्रॉफी अभिषेक बच्चन के हाथों में आई।
अभिषेक ने अपनी फिल्म ‘गुरुदक्षिणा’ के लिए बेस्ट एक्टर (क्रिटिक्स) का खिताब जीता। यह फिल्म एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो सामाजिक अन्याय और निजी संघर्षों से जूझते हुए अपनी पहचान बनाता है। मंच पर अवॉर्ड लेते हुए अभिषेक ने भावुक होकर कहा, “25 साल का सफर आसान नहीं रहा। कई बार गिरा, कई बार संभला, लेकिन दर्शकों ने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा। यह अवॉर्ड मेरे पिता को समर्पित है, जिन्होंने मुझे सिखाया कि असफलता ही सफलता का पहला कदम होती है।”

वहीं, ‘लापता लेडीज’ ने इस बार अवॉर्ड्स की झड़ी लगा दी। कियारा कश्यप के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट स्क्रीनप्ले और बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस जैसे कई बड़े अवॉर्ड्स जीते। यह फिल्म समाज की पितृसत्तात्मक सोच और महिला सशक्तिकरण पर आधारित है, जिसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने खूब सराहा।
बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड विद्या बालन को उनकी फिल्म ‘काफिला’ के लिए मिला, जिसमें उन्होंने एक पत्रकार की भूमिका निभाई जो सच्चाई की तलाश में अपने जीवन को दांव पर लगा देती है। विद्या ने अपने भाषण में कहा, “असली अवॉर्ड तब मिलता है जब दर्शक थिएटर से सोच में डूबकर बाहर निकलें।”
इसके अलावा बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का अवॉर्ड प्रीतम को फिल्म ‘दिल से दिल्ली’ के लिए मिला, जबकि बेस्ट लिरिक्स का खिताब गुलज़ार साहब को उनकी कवितामय पंक्तियों के लिए दिया गया।
फिल्मफेयर 2025 की यह शाम न केवल सितारों की मौजूदगी से जगमगा उठी, बल्कि इसने एक संदेश भी दिया—कि बॉलीवुड में फिर से कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा का दौर लौट आया है। दर्शक अब सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि असली कहानियों की तलाश में हैं।
रात के अंत में जब पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गूंज से भर उठा, तो साफ हो गया कि यह शाम अभिषेक बच्चन और ‘लापता लेडीज’ के नाम रही। यह फिल्मफेयर अवॉर्ड्स याद किए जाएंगे एक नए युग की शुरुआत के रूप में—जहां मेहनत, लगन और सच्ची कहानी कहने की कला ने फिर से अपनी पहचान बनाई। BY SHRUTI KUAMRI
