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105 गानों को रिजेक्ट करने के बाद पूरी हुई थी तलाश, 65 साल पुरानी मूवी का ये सॉन्ग आज भी है कल्ट

भारतीय सिनेमा के पास यादों का एक अनमोल ख़ज़ाना है, जिसमें पुराने गीत सिर्फ तुकबंदी नहीं, बल्कि समय की धड़कन बनकर मौजूद हैं। ऐसे ही एक गीत का नाम आते ही दिल में एक अलग ही मिठास घुल जाती है, फिल्म ‘तलाश’ (1969) का सुपरहिट सॉन्ग ‘कितनी अकेली कितनी तन्हा सी ये रात है’। यह गीत न सिर्फ संगीत प्रेमियों के दिलों में बसेऱे करता आया है, बल्कि इसके पीछे एक ऐसा सफर छिपा है, जो संघर्ष, धैर्य और कला के प्रति समर्पण की मिसाल है।

आज इस फिल्म और इसके संगीत को बने हुए लगभग 65 साल होने को आए, लेकिन इसकी लोकप्रियता में ज़रा भी कमी नहीं आई है। खास बात यह है कि इस फिल्म के सुपरहिट गीत को चुनने से पहले करीब 105 गानों को रिजेक्ट किया गया था। यह संघर्ष बताता है कि कला कभी समझौते पर नहीं बनती—वह समय, मेहनत और पहचान की मांग करती है।


कला की खोज का सफर : जब 105 गाने हुए रिजेक्ट

फिल्म ‘तलाश’ का संगीत भारतीय सिनेमा के इतिहास में इसलिए भी दर्ज है क्योंकि इसका हर सुर सोच-समझकर गढ़ा गया। निर्देशक और संगीतकार एक ऐसा गीत खोज रहे थे, जो फिल्म की आत्मा को आवाज़ दे सके। लेकिन बात इतनी आसान नहीं थी। रिकॉर्डिंग रूम में एक के बाद एक धुनें उभरती गईं और खारिज होती गईं।

हर गाना सुना जाता, नोट्स पर चर्चा होती, और फिर एक नई कोशिश शुरू होती। यह प्रक्रिया लंबी थी, क्योंकि टीम किसी साधारण गीत से संतुष्ट नहीं थी। कहानी के भाव, किरदार का दर्द और दृश्य की संवेदना—इन सभी को सुरों में पकड़ना जरूरी था।

अंततः, लंबे इंतजार और लगातार मेहनत के बाद वह धुन मिली जो आज इतिहास बन चुकी है।


कल्ट सॉन्ग: समय से परे एक धुन

भले ही फिल्म ‘तलाश’ आज नई पीढ़ी के लिए उतनी जानी-पहचानी न हो, लेकिन इसका गीत समय से आगे निकल चुका है। इसे सुनने पर आज भी वही ताजगी महसूस होती है, वही असर उतना ही गहरा।

इस गीत की प्रसिद्धी का कारण सिर्फ धुन नहीं, बल्कि इसकी गहराई है—

  • इसके शब्दों में अकेलेपन की पीड़ा है
  • आवाज़ में संवेदना है
  • संगीत में वह खामोशी है, जो भीतर उतर जाती है

यह गीत उन चंद धुनों में से है, जिन्हें सुनकर वक्त थम सा जाता है। यही वजह है कि पुरानी पीढ़ी इसे याद करती है और नई पीढ़ी इसे जानकर हैरान होती है।


शादियों के गानों से दूर, दिल में बसी धुन

आज के समय में कई गाने लोकप्रियता तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन समय की कसौटी पर टिक नहीं पाते। ‘तलाश’ का यह सॉन्ग भी शादी या पार्टी के माहौल के लिए नहीं बना था—यह भावनाओं के लिए बना था। शायद यही वजह है कि यह दिलों में हमेशा के लिए जगह बना चुका है। पुरानी तारें आज भी साफ सुनाई देती हैं, और यह गीत आज की आधुनिक धुनों के बीच भी उतना ही दमदार है।

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