
हिंदी सिनेमा की दुनिया में कुछ प्रेम कहानियाँ ऐसी हैं, जो सिर्फ फ़िल्मी पर्दे पर नहीं, बल्कि सच में भी दिल को छू जाती हैं। सुनील दत्त और नरगिस की प्रेम कहानी उनमें से एक है। यह कहानी न सिर्फ दो सितारों के मिलन की दास्तान है, बल्कि एक गहरे त्याग, समर्पण और इंसानी रिश्तों की गर्माहट का प्रतीक भी है। दिलचस्प बात यह है कि इस खूबसूरत रिश्ते की शुरुआत संजय दत्त की बुआ यानी सुनील दत्त की बहन की वजह से हुई थी। यह बात खुद संजय दत्त की बहन प्रिया दत्त और नम्रता दत्त ने कई इंटरव्यू में स्वीकार की है।
सुनील दत्त का सफर संघर्षों से भरा रहा। एक छोटे से रेडियो जॉकी के रूप में शुरुआत करने वाले सुनील दत्त, फिल्मों में कदम रखते ही धीरे-धीरे दर्शकों के दिलों पर छा गए। दूसरी तरफ नरगिस उस दौर की सुपरस्टार थीं। सुंदरता, प्रतिभा और लोकप्रियता में उनका कोई मुकाबला नहीं था। सामान्यतः देखा जाए तो उस समय सुनील दत्त और नरगिस दो अलग-अलग दुनिया के लोग थे—एक सितारा जिसने शोहरत के शिखर छुए थे और दूसरा कलाकार जो अपना मुकाम बना रहा था। ऐसे में दोनों का मिलना किसी चमत्कार जैसा था।

1957 में आई ब्लॉकबस्टर फ़िल्म “मदर इंडिया” ने दोनों की किस्मत बदल दी। इस फिल्म में सुनील दत्त ने नरगिस के बेटे का किरदार निभाया था, और शूटिंग के दौरान ऐसे कई पल आए, जिन्होंने दोनों को एक-दूसरे के करीब ला दिया। लेकिन इस प्रेम कहानी की नींव फिल्म से पहले ही पड़ चुकी थी और वह भी संजय दत्त की बुआ की वजह से।
दरअसल, सुनील दत्त की बहन नरगिस की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं। वह उनकी फिल्मों से बेहद प्रभावित थीं और नरगिस से मिलना चाहती थीं। जब सुनील दत्त को पता चला कि नरगिस स्टूडियो में शूटिंग कर रही हैं, तो उन्होंने अपनी बहन की इच्छा पूरी करने के लिए एक बार मुलाक़ात की कोशिश की। इसी दौरान सुनील दत्त और नरगिस के बीच पहली बार बातचीत हुई। नरगिस ने सुनील दत्त की सादगी और व्यवहार से प्रभावित होकर उनका अभिवादन स्वीकार किया और मल्टीस्टार माहौल के बीच यह रिश्ता धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गया।
इसके बाद आई वह घटना जिसने दोनों को हमेशा के लिए जोड़ दिया। मदर इंडिया की शूटिंग के दौरान स्टूडियो में अचानक आग लग गई। सुनील दत्त ने अपनी जान की परवाह किए बिना नरगिस को बचा लिया। यह वह पल था जिसने नरगिस के दिल में सुनील दत्त के लिए एक नई जगह बना दी। नरगिस ने बाद में कहा कि इस मुकाम पर उन्हें महसूस हुआ कि सुनील दत्त सिर्फ एक दोस्त नहीं, बल्कि जीवनभर का साथी बन सकते हैं।
1958 में दोनों ने शादी कर ली। नरगिस ने अपने करियर से दूरी बनाई और पूरी तरह से अपने परिवार को समर्पित हो गईं। कुछ वर्षों बाद जब नरगिस गंभीर बीमारी से जूझीं, तब सुनील दत्त ने हर पल उनके साथ रहकर यह साबित कर दिया कि सच्चा प्यार सिर्फ साथ होने का नाम नहीं, बल्कि साथ निभाने का नाम है।
आज, संजय दत्त और उनकी बहनें जब इन पुरानी यादों को याद करती हैं, तो वह गर्व से कहती हैं कि अगर उनकी बुआ उस दिन नरगिस से मिलने की इच्छा ना जतातीं, तो शायद बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत प्रेम कहानियों में से एक कभी शुरू ही नहीं होती। सुनील दत्त और नरगिस का रिश्ता आज भी भारतीय सिनेमा और प्रेम के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
