
हिंदी सिनेमा में कई ऐसे किस्से दर्ज हैं, जो सुनकर दिल पिघल जाता है। बॉलीवुड के महान गायक किशोर कुमार अपनी आवाज़ से लाखों दिलों पर राज करते थे। उनका हर गाना भावनाओं से लबरेज़ होता था, लेकिन एक बार ऐसा मौका आया जब वे खुद स्टूडियो में गाना रिकॉर्ड करते-करते रो पड़े। यह घटना उन चंद लम्हों में से है जो बताती है कि किशोर दा सिर्फ गायक नहीं, बल्कि दिल से महसूस करने वाले कलाकार थे।
बात उस दौर की है जब मिथुन चक्रवर्ती अपनी फिल्मों के जरिए दर्शकों के चहेते बने हुए थे। उसी समय एक फिल्म के लिए किशोर कुमार को बेहद भावुक गाना रिकॉर्ड करना था। गाने के बोल इतने मार्मिक थे कि दिल को भीतर तक छू जाते थे। रिकॉर्डिंग शुरू हुई, संगीत धीरे-धीरे बहने लगा और किशोर दा ने अपनी उसी खास अंदाज़ में सुर साधना शुरू की। लेकिन जैसे-जैसे गीत आगे बढ़ा, उनकी आवाज़ में कंपन आने लगी। संगीतकारों ने भी महसूस किया कि कुछ अलग हो रहा है।
गाने के दर्द ने जैसे उनके दिल को झकझोर दिया था। कहते हैं कि गाते हुए उन्हें अपने जीवन के कई पुराने ज़ख्म याद आ गए—उनकी निजी जिंदगी की परेशानियाँ, रिश्तों की टूटन और अकेलापन। वे खुद भी नहीं रोक पाए और अंततः गाने के बीच में ही उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। रिकॉर्डिंग रोकनी पड़ी। स्टूडियो में मौजूद हर शख्स सन्न रह गया क्योंकि यह पहली बार था जब किसी ने अपने सामने किशोर दा को इतना भावुक होते देखा।

कुछ देर बाद उन्होंने खुद को संभाला और कहा कि “गाना तभी सच्चा बनता है जब उसे दिल से महसूस किया जाए।” उन्होंने दोबारा माइक संभाला और जो रिकॉर्डिंग हुई, वह आज भी सुनने वालों की आंखें नम कर देती है। यही वजह है कि उनके गाए दर्द भरे गीत सीधे दिल में उतर जाते हैं।
मिथुन चक्रवर्ती ने भी कई बार कहा है कि वे खुद किशोर कुमार की आवाज़ में एक अलग जुड़ाव महसूस करते थे। उनके अनुसार, किसी भी गायक में किशोर दा जैसा दर्द, मिठास और जुनून मिलना मुश्किल है।
यह घटना सिर्फ एक रिकॉर्डिंग का प्रसंग नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि सच्ची कला वही होती है जो कलाकार के दिल से निकलकर दूसरे दिल तक पहुंचे। किशोर कुमार ने इसे साबित किया और शायद इसी वजह से उनका गाया हर गीत सदाबहार बन जाता है।
