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राजदीप सिकदर पहाड़ों से मुंबई तक एक संघर्षमयी अभिनय यात्रा

कहते हैं, पहाड़ों से निकलने वाली हवा में सादगी, मेहनत और लगन की खुशबू होती है। इन्हीं खुशबुओं में पले-बढ़े अभिनेता राजदीप सिकदर ने अपने सपनों को आसमान तक पहुंचाने का सफर तय किया है। दार्जिलिंग के सिलीगुड़ी से निकलकर मुंबई की चमचमाती दुनिया तक पहुँचना उनके लिए आसान नहीं था, मगर उनकी मेहनत, लगन और अभिनय के प्रति जुनून ने उन्हें आज एक पहचान दिलाई है।राजदीप सिकदर का जन्म एक संगीतमय परिवार में हुआ। उनकी माँ, बुआ और मौसी सभी गायिका हैं, इसलिए कला उनके खून में ही थी। बचपन से ही वे स्कूल और कॉलेज में नाटक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई और कॉलेज सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग से पूरी की। इसके बाद उनका सफर बेंगलुरु की ओर मुड़ा, जहाँ उन्होंने जॉब करते हुए मॉडलिंग की शुरुआत की। बेंगलुरु में मॉडलिंग ने उन्हें मंच और कैमरे का आत्मविश्वास दिया, लेकिन उनके दिल में हमेशा से एक सपना था एक्टर बनने का। मुंबई आने के बाद उन्होंने एक्टिंग स्कूल जॉइन किया, जहाँ उन्होंने अभिनय की बारीकियाँ सीखीं। कोर्स पूरा करने के बाद नाटक, वर्कशॉप और फिर अंतहीन ऑडिशन का सिलसिला शुरू हुआ सिलेक्शन और रिजेक्शन दोनों का अनुभव लेते हुए उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

राजदीप का पहला बड़ा ब्रेक टेलीविज़न शो “सीआईडी” से मिला। वहीं उन्होंने पहली बार डायलॉग के साथ कैमरे के सामने अभिनय किया। उन्होंने शो के प्रमुख किरदारों दया, अभिजीत और एसीपी प्रद्युमन के साथ सीन साझा किया। यही वो मंच था जिसने उन्हें पहचान दी और आत्मविश्वास भी। इसके बाद वे बार-बार सीआईडी में नज़र आए और फिर क्राइम पेट्रोल और सावधान इंडिया जैसे पॉपुलर शो में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

राजदीप मानते हैं कि उनकी प्रेरणा बनी फिल्म “3 इडियट्स”, जिसने उन्हें यह एहसास कराया कि इंसान को वही काम करना चाहिए जिसमें उसका दिल बसता है। उन्होंने उसी दिन ठान लिया था कि एक्टिंग ही उनका असली रास्ता है। करियर के दौरान उन्होंने कई नेगेटिव और पॉज़िटिव किरदार निभाए हैं, लेकिन उन्हें नेगेटिव रोल्स में गहराई तक उतरना ज्यादा पसंद है ऐसे किरदार जो उनके असली व्यक्तित्व से बिल्कुल अलग होते हैं। वे कहते हैं, “ऐसे रोल्स मुझे एक्सप्लोर करने का मौका देते हैं कि इंसान कितने चेहरे रख सकता है।”

राजदीप का सपना है कि वे कभी किसी फ्रीडम फाइटर का किरदार निभाएं चाहे वो नेताजी सुभाष चंद्र बोस हों या भगत सिंह। वे मानते हैं कि देश के लिए कुर्बानी देने वाले ऐसे किरदार निभाना गर्व की बात होगी।फिलहाल राजदीप दो फिल्मों और एक वेब सीरीज पर काम कर रहे हैं, जिनमें से एक बड़ी फिल्म 2026 में रिलीज़ होने की संभावना है। वेब प्लेटफॉर्म्स और वर्टिकल सीरीज में भी वे सक्रिय हैं। भविष्य को लेकर राजदीप का सपना साफ है “पाँच साल बाद मैं एक ऐसा एक्टर बनना चाहता हूँ जिसे लोग सिर्फ चेहरे से नहीं, नाम से पहचानें ।” उनका मानना है कि जब तक लोग आपका नाम याद न रखें, तब तक मेहनत बाकी है।राजदीप सिकदर की कहानी सिर्फ एक एक्टर की नहीं, बल्कि उस इंसान की है जिसने पहाड़ों की मिट्टी से उठकर मुंबई के सेट्स तक अपने सपनों को सच किया बिना रुके, बिना झुके।लेखक संपादक राहुल कुमार शुक्ला

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