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कपूर खानदान की अमर प्रेम गाथा: शशि कपूर और जेनिफर केंडल

राइटर- विजय तिवारी

बॉलीवुड और भारतीय थिएटर की दुनिया में शशि कपूर और जेनिफर केंडल की प्रेम कहानी एक प्रेरणादायक दंतकथा की तरह कही जाती है। यह केवल दो कलाकारों का मिलन नहीं है, बल्कि यह भारतीय सिनेमा और थिएटर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ भी है। उनकी जोड़ी ने पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन दोनों में कला और प्रेम की मिसाल कायम की।पहली मुलाकात और प्यार का आरंभ1956 में कोलकाता के रॉयल ओपेरा हाउस में शशि कपूर और जेनिफर केंडल की पहली मुलाकात हुई।

उस समय शशि कपूर अपने पिता पृथ्वीराज कपूर की स्थापना ‘पृथ्वी थिएटर’ के साथ जुड़े हुए थे, जबकि जेनिफर अपने पिता जॉर्ज केंडल के ‘शेक्सपियराना’ थिएटर समूह के तहत अभिनय कर रही थीं। इस मुलाकात में शशि कपूर ने जेनिफर को पहली ही नजर में पसंद कर लिया। यह पहली झलक उनके जीवन का अहम मोड़ साबित हुई, जिसने आने वाले वर्षों में प्रेम, संघर्ष और कला का अद्भुत मिश्रण तैयार किया।

विवाह और पारिवारिक संघर्ष

धीरे-धीरे उनके बीच गहरा प्रेम विकसित हुआ और 1958 में दोनों ने शादी कर ली। उस समय शशि कपूर मात्र 20 वर्ष के थे और जेनिफर केंडल 25 वर्ष की थीं। उनकी शादी ने पारंपरिक सोच को चुनौती दी, क्योंकि जेनिफर विदेशी थीं और उनके परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया। लेकिन कपूर खानदान के भीतर, विशेषकर शशि की बहन गीता बाली ने उनका पूरा समर्थन किया, जिससे यह प्रेम कहानी हकीकत में बदल सकी।

साझा जीवन और परिवार

शशि और जेनिफर के संयुक्त जीवन से तीन संतानें हुईं—करण कपूर, कुनाल कपूर और संजना कपूर। सभी बच्चों ने अभिनय और थिएटर में योगदान दिया। खासकर संजना कपूर ने 1993 से 2012 तक मुंबई स्थित ‘पृथ्वी थिएटर’ का संचालन किया, जो शशि और जेनिफर की साझा कला और प्रेम की विरासत का प्रतीक है।जेनिफर के निधन का शोक1982 में जेनिफर केंडल को कोलन कैंसर का पता चला और 7 सितंबर 1984 को उनका निधन हो गया। शशि कपूर गहरे शोक में डूब गए। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, “मैंने जेनिफर से 100 सालों तक शादी की है।” यह कथन उनकी गहरी भावनाओं और जेनिफर के प्रति अटूट प्रेम का साक्ष्य है।

फिल्मों और कला में योगदान

शशि कपूर और जेनिफर केंडल ने कई फिल्मों में साथ अभिनय किया, जिनमें ‘36 चौरींगही लेन’ (1981), ‘बॉम्बे टॉकीज’ (1970), ‘जुनून’ (1978) और ‘हीट एंड डस्ट’ (1983) शामिल हैं। इन फिल्मों में उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब सराहा, और इसने भारतीय सिनेमा में उनका महत्वपूर्ण स्थान सुनिश्चित किया।कला और प्रेम की अमर विरासतशशि कपूर और जेनिफर केंडल की प्रेम कहानी सिर्फ व्यक्तिगत रिश्ते की नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा और थिएटर के इतिहास में एक प्रेरक अध्याय है। उनका साझा योगदान—‘पृथ्वी थिएटर’ आज भी कला और संस्कृति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सच्चा प्रेम किसी भी बाधा को पार कर सकता है और कला के प्रति समर्पण अनमोल होता है।

देखी जाने वाली फिल्में और नाटक

यदि आप शशि कपूर और जेनिफर केंडल की प्रेम कहानी और कला को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो ‘36 चौरींगही लेन’ और ‘बॉम्बे टॉकीज’ जैसी फिल्मों को अवश्य देखें। ये फिल्में न केवल उनकी अदाकारी की खूबसूरती को दिखाती हैं, बल्कि उनके जीवन और प्रेम की गहराई को भी जीवंत करती हैं।

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