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ऐश्वर्या-रेखा दोनों ने निभाया एक ही किरदार, एक को मिला पुरस्कार, दूसरी की झोली रही खाली

बॉलीवुड में कई बार ऐसा हुआ है जब एक ही किरदार को अलग-अलग समय पर दो अभिनेत्रियों ने निभाया हो। लेकिन हर बार नतीजा एक जैसा नहीं रहा। ऐसा ही कुछ हुआ था जब सदी की दो बेहतरीन अदाकाराएं — रेखा और ऐश्वर्या राय बच्चन — ने एक ही किरदार को पर्दे पर जिया। फर्क बस इतना था कि एक को इस रोल ने स्टारडम की ऊंचाई पर पहुंचाया, जबकि दूसरी के हिस्से आई तारीफें तो मिलीं, पर सफलता और पुरस्कार से दामन खाली रहा। यह बात हो रही है मशहूर उपन्यास “देवदास” की पारो (पार्वती) की कहानी की। रेखा ने 1980 में आई फिल्म “देवदास” में पारो की भूमिका निभाई थी, जबकि ऐश्वर्या राय बच्चन ने साल 2002 में संजय लीला भंसाली की “देवदास” में यही किरदार दोबारा निभाया। दोनों ही फिल्मों में किरदार का दर्द, प्रेम और सामाजिक मर्यादाओं का संघर्ष केंद्र में था, लेकिन परिणाम अलग-अलग रहे। रेखा की देवदास को दर्शकों और समीक्षकों की सराहना तो मिली, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी। उस दौर में रेखा की परफॉर्मेंस को ‘संवेदनशील’ कहा गया, पर यह रोल उनके करियर का मील का पत्थर नहीं बन सका। वहीं, जब संजय लीला भंसाली ने देवदास (2002) बनाई, तो फिल्म भव्यता और भावनाओं का ऐसा संगम बन गई जिसने इतिहास रच दिया। ऐश्वर्या राय ने पारो के किरदार में अपनी मासूमियत और भावनाओं की गहराई से जान डाल दी। उनकी खूबसूरती, संवाद अदायगी और शालीनता ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देवदास (2002) ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर बम्पर कमाई की बल्कि देश-विदेश में कई पुरस्कार भी जीते। इस फिल्म ने ऐश्वर्या को एक सशक्त अभिनेत्री के रूप में स्थापित कर दिया। जहां रेखा के समय में देवदास सीमित दर्शकों तक पहुंची थी, वहीं ऐश्वर्या की देवदास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान बनी। यह फिल्म कान्स फिल्म फेस्टिवल तक पहुंची, और पारो का किरदार भारतीय सिनेमा की यादगार भूमिकाओं में शामिल हो गया। इस तुलना से साफ है कि एक ही किरदार को दो अदाकाराओं ने अपनी-अपनी शैली में जिया — रेखा ने उसे भावनात्मक गहराई से और ऐश्वर्या ने उसे भव्यता व आधुनिक सेंस के साथ। लेकिन वक्त और प्रस्तुति ने ऐश्वर्या को वह ऊंचाई दी, जो रेखा को नहीं मिल सकी। फिल्मी दुनिया में यही तो दिलचस्प बात है — किरदार एक ही हो सकता है, पर उसे अमर बनाने की ताकत समय और प्रस्तुति दोनों से तय होती है। रेखा और ऐश्वर्या की पारो इसका बेहतरीन उदाहरण हैं।

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फिल्म और टीवी जगत के दिग्गज कॉमेडियन सतीश शाह का निधन, इंडस्ट्री में शोक की लहर

डेस्क रिपोर्ट : विजय तिवारी मुंबई : हिंदी सिनेमा और टेलीविजन की दुनिया के मशहूर अभिनेता और हास्य के बादशाह सतीश शाह अब हमारे बीच नहीं रहे। 74 वर्षीय सतीश शाह का 25 अक्टूबर को मुंबई में किडनी फेलियर के चलते निधन हो गया। उनके अचानक चले जाने से फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में गहरा शोक छा गया है। शुरुआती जीवन और शिक्षा सतीश शाह का जन्म 1951 में हुआ था। वे बचपन से ही अभिनय और कला के प्रति रुचि रखते थे। उनके परिवार ने भी उनका हौसला बढ़ाया और उन्होंनें अपने अभिनय का प्रशिक्षण थिएटर के माध्यम से प्राप्त किया। मुंबई आने से पहले उन्होंने छोटे मंचों और कॉलेज थिएटर में अभिनय किया, जहां उनकी कॉमिक प्रतिभा और सहज हाव-भाव ने दर्शकों का दिल जीत लिया। थिएटर और टीवी में करियर सतीश शाह का करियर थिएटर से शुरू हुआ, लेकिन उन्हें असली पहचान टीवी शो ‘ये जो है ज़िंदगी’ से मिली। इस शो में उनका किरदार दर्शकों के बीच घर-घर में लोकप्रिय हुआ। उन्होंने ‘हम पांच’, ‘हम सब’, ‘फ्लाइंग किचन’, और ‘ज्वेल्स ऑफ द इंडिया’ जैसे कई शो में भी अभिनय किया। उनकी कॉमिक टाइमिंग इतनी लाजवाब थी कि गंभीर सीन में भी दर्शक उनके अभिनय पर हंसते बिना नहीं रह पाते थे। वे हमेशा अपने किरदारों में प्राकृतिक हास्य और सहजता बनाए रखते थे, जिससे उनके अभिनय में कोई बनावट नहीं दिखती थी। फिल्मी करियर सतीश शाह ने फिल्मों में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने ‘जाने भी दो यारो’, ‘मैं हूँ ना’, ‘ओम शांति ओम’, ‘कल हो ना हो’, और ‘3 इडियट्स’ जैसी हिट फिल्मों में अभिनय किया। ‘जाने भी दो यारो’ में उनका हास्यप्रधान किरदार आज भी सिनेमाप्रेमियों के लिए यादगार है। ‘ओम शांति ओम’ में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के पर्दे के पीछे की राजनीति और जटिलताओं को अपनी अदाकारी से जीवंत किया। ‘3 इडियट्स’ और ‘कल हो ना हो’ में उनके छोटे पर प्रभावशाली किरदार ने दर्शकों को हंसाया और भावविभोर किया। सतीश शाह की हर फिल्म और शो में योगदान केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था, वे अपने किरदारों में जीवन की सादगी और मानवीय भावनाओं को जीवंत करते थे। उनके डायलॉग और हल्के-फुल्के हास्य संवाद आज भी लोगों की यादों में ताजा हैं। सहयोग और सम्मान सतीश शाह ने न केवल कॉमिक किरदार निभाए, बल्कि नए कलाकारों को मार्गदर्शन देने में भी पीछे नहीं रहे। उनके साथी कलाकार और फिल्ममेकर उन्हें समर्पित और मेहनती कलाकार के रूप में याद करते हैं। फिल्ममेकर अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर उनके निधन की पुष्टि करते हुए कहा, “सतीश भाई ने हर किरदार को दिल से निभाया। उनके जाने से इंडस्ट्री ने सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि एक आत्मा खो दी।” सोशल मीडिया पर बॉलीवुड के दिग्गजों ने भी भाव व्यक्त किए। अभिनेता अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, जॉनी लीवर सहित कई कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया। व्यक्तिगत जीवन और विरासत सतीश शाह का व्यक्तित्व बहुत सरल और मिलनसार था। वे अपने सहकर्मियों और सह-अभिनेताओं के बीच हमेशा मित्रवत और सहयोगी बने। उनकी हास्य कला ने कई पीढ़ियों को प्रभावित किया और मनोरंजन की दुनिया में उनका योगदान अमूल्य रहा। सतीश शाह की कॉमिक टाइमिंग, सहज अभिनय और यादगार किरदारों ने उन्हें दर्शकों के दिल में हमेशा के लिए अमर बना दिया। उनका जाना हिंदी सिनेमा और टीवी इंडस्ट्री के लिए अपूरणीय क्षति है।

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ऋषि कपूर को याद कर इमोशनल हुए रणबीर कपूर, बोले– “ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब पापा याद न आते हों”

बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर ने एक हालिया कार्यक्रम में अपने पिता ऋषि कपूर को याद करते हुए भावुक कर देने वाली बातें कहीं। अपने शानदार अभिनय और विनम्र स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले रणबीर ने कहा कि भले ही उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी आज भी उनके दिल और काम में महसूस होती है। मुंबई में आयोजित एक फिल्म प्रमोशन इवेंट के दौरान जब पत्रकारों ने रणबीर से उनके पिता की कोई यादगार बात पूछी, तो वे कुछ पल के लिए रुक गए। आंखों में नमी लिए रणबीर बोले, “ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब मैं पापा को याद न करता हूं। वो मेरे जीवन के सबसे बड़े प्रेरणास्त्रोत थे। उनकी डांट भी प्यार भरी होती थी, और उनका गुस्सा भी मुझे आगे बढ़ने की ताकत देता था।” ऋषि कपूर का निधन 30 अप्रैल 2020 को हुआ था, लेकिन उनके चाहने वालों और परिवार के लिए वह आज भी जिंदा हैं। रणबीर ने आगे कहा, “जब भी किसी सीन के लिए कैमरे के सामने खड़ा होता हूं, तो ऐसा लगता है जैसे पापा वहीं कहीं खड़े होकर देख रहे हों। उनकी आवाज अब भी कानों में गूंजती है – ‘एक्सप्रेशन में सच्चाई रखो, ओवरएक्ट मत करो।’” रणबीर ने बताया कि उनके पिता हमेशा चाहते थे कि वह अपनी पहचान खुद बनाएं, न कि केवल कपूर खानदान के वारिस के रूप में। उन्होंने कहा, “पापा ने कभी आसान रास्ता नहीं दिखाया। वे चाहते थे कि मैं अपनी गलतियों से सीखूं। आज अगर लोग मुझे एक अच्छा अभिनेता मानते हैं, तो उसमें उनका सबसे बड़ा योगदान है।” इवेंट के दौरान मौजूद दर्शकों ने रणबीर की बातों पर तालियां बजाईं, जबकि खुद रणबीर कुछ देर के लिए भावुक होकर चुप हो गए। उन्होंने बताया कि अपनी आने वाली फिल्म ‘दिल की कहानी’ को उन्होंने अपने पिता को समर्पित किया है। उनके अनुसार, यह फिल्म उस रिश्ते को दर्शाती है जहां पिता और बेटे के बीच भावनाओं का संघर्ष और गहरा प्यार दोनों मौजूद होते हैं। रणबीर ने यह भी कहा कि वे अक्सर ऋषि कपूर की पुरानी फिल्में देखते हैं और उनके अभिनय से आज भी प्रेरणा लेते हैं। “जब मैं ‘बॉबी’, ‘चांदनी’ या ‘कर्ज़’ देखता हूं, तो समझ आता है कि उन्होंने अपने समय में कितना नया प्रयोग किया था। मैं उनके जैसा तो नहीं बन सकता, लेकिन कोशिश जरूर करता हूं कि वो मुझ पर गर्व करें।” कार्यक्रम के अंत में रणबीर ने कहा, “पापा ने सिखाया कि जिंदगी में सच्चा बनना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है। वो भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका प्यार और सीख हर कदम पर साथ है।” रणबीर की यह भावनात्मक यादें सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। यह लम्हा एक बार फिर साबित कर गया कि पिता और बेटे का रिश्ता सिर्फ खून का नहीं, बल्कि आत्मा का बंधन होता है—जो मौत के बाद भी कभी खत्म नहीं होता। by shruti kumari

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Filmfare Awards 2025: 25 साल बाद अभिषेक बच्चन बने ‘बेस्ट एक्टर’, ‘लापता लेडीज’ के नाम रही शाम

मुंबई में रविवार रात आयोजित हुए फिल्मफेयर अवॉर्ड्स 2025 ने बॉलीवुड के सितारों से सजी शाम को यादगार बना दिया। इस बार का अवॉर्ड समारोह कई मायनों में खास रहा—क्योंकि 25 साल बाद अभिषेक बच्चन ने अपने करियर का सबसे बड़ा अवॉर्ड अपने नाम किया। वहीं, कास्टिंग और कहानी के दम पर छाई रही फिल्म ‘लापता लेडीज’ ने इस साल के अधिकतर अवॉर्ड्स अपने नाम कर लिए। फिल्मफेयर की इस चमकदार शाम में फिल्म इंडस्ट्री के लगभग सभी बड़े सितारे शामिल हुए। रेड कार्पेट पर दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, आलिया भट्ट, वरुण धवन, कृति सेनन, और अनन्या पांडे जैसे स्टार्स ने अपने लुक्स से सबका दिल जीत लिया। लेकिन रात की असली चर्चा उस वक्त हुई जब बेस्ट एक्टर की ट्रॉफी अभिषेक बच्चन के हाथों में आई। अभिषेक ने अपनी फिल्म ‘गुरुदक्षिणा’ के लिए बेस्ट एक्टर (क्रिटिक्स) का खिताब जीता। यह फिल्म एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो सामाजिक अन्याय और निजी संघर्षों से जूझते हुए अपनी पहचान बनाता है। मंच पर अवॉर्ड लेते हुए अभिषेक ने भावुक होकर कहा, “25 साल का सफर आसान नहीं रहा। कई बार गिरा, कई बार संभला, लेकिन दर्शकों ने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा। यह अवॉर्ड मेरे पिता को समर्पित है, जिन्होंने मुझे सिखाया कि असफलता ही सफलता का पहला कदम होती है।” वहीं, ‘लापता लेडीज’ ने इस बार अवॉर्ड्स की झड़ी लगा दी। कियारा कश्यप के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट स्क्रीनप्ले और बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस जैसे कई बड़े अवॉर्ड्स जीते। यह फिल्म समाज की पितृसत्तात्मक सोच और महिला सशक्तिकरण पर आधारित है, जिसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने खूब सराहा। बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड विद्या बालन को उनकी फिल्म ‘काफिला’ के लिए मिला, जिसमें उन्होंने एक पत्रकार की भूमिका निभाई जो सच्चाई की तलाश में अपने जीवन को दांव पर लगा देती है। विद्या ने अपने भाषण में कहा, “असली अवॉर्ड तब मिलता है जब दर्शक थिएटर से सोच में डूबकर बाहर निकलें।” इसके अलावा बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का अवॉर्ड प्रीतम को फिल्म ‘दिल से दिल्ली’ के लिए मिला, जबकि बेस्ट लिरिक्स का खिताब गुलज़ार साहब को उनकी कवितामय पंक्तियों के लिए दिया गया। फिल्मफेयर 2025 की यह शाम न केवल सितारों की मौजूदगी से जगमगा उठी, बल्कि इसने एक संदेश भी दिया—कि बॉलीवुड में फिर से कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा का दौर लौट आया है। दर्शक अब सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि असली कहानियों की तलाश में हैं। रात के अंत में जब पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गूंज से भर उठा, तो साफ हो गया कि यह शाम अभिषेक बच्चन और ‘लापता लेडीज’ के नाम रही। यह फिल्मफेयर अवॉर्ड्स याद किए जाएंगे एक नए युग की शुरुआत के रूप में—जहां मेहनत, लगन और सच्ची कहानी कहने की कला ने फिर से अपनी पहचान बनाई। BY SHRUTI KUAMRI

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कॉमेडियन Bharti Singh बनीं दोबारा मां, खूबसूरत तस्वीर के साथ दी खुशखबरी!

Bharti Singh: टीवी की मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह (Bharti Singh) ने एक बार फिर फैंस को खुशखबरी दी है। भारती ने अपने दूसरे बच्चे की प्रेग्नेंसी की अनाउंसमेंट सोशल मीडिया पर एक बेहद खूबसूरत तस्वीर शेयर कर की है। तस्वीर में भारती अपने पति हर्ष लिंबाचिया (Haarsh Limbachiyaa) के साथ नजर आ रही हैं, दोनों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही है। भारती ने पोस्ट के साथ कैप्शन लिखा — “हमारा परिवार अब चार होने जा रहा है… आपका आशीर्वाद चाहिए।” बस फिर क्या था, कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़ आ गई। फैंस से लेकर सेलेब्स तक सभी ने कमेंट कर कपल को शुभकामनाएं दीं। भारती और हर्ष ने साल 2017 में शादी की थी। 2022 में दोनों अपने पहले बच्चे लक्ष्य (Golla) के माता-पिता बने थे। भारती अक्सर अपने यूट्यूब व्लॉग्स और इंस्टाग्राम रील्स में बेटे लक्ष्य के साथ मस्ती करते हुए दिखाई देती हैं।दूसरी बार मां बनने की खबर ने उनके फैंस को बेहद खुश कर दिया है। कॉमेडी की दुनिया में अपनी टाइमिंग और सेंस ऑफ ह्यूमर से लोगों का दिल जीतने वाली भारती अब एक बार फिर “मॉमी मोड” में जाने की तैयारी में हैं। कई फैंस ने कमेंट किया — “गोला को मिलने वाला है छोटा भाई या प्यारी बहन!” वहीं कुछ ने लिखा, “भारती फिर से मम्मी बनने वाली हैं, कितना प्यारा सरप्राइज है।” भारती सिंह की यह तस्वीर और खुशखबरी फिलहाल पूरे इंटरनेट पर ट्रेंड कर रही है, और फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं उनके “बेबी नंबर 2” के आने का।

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Bhojpuri stars Pawan Singh and Akshara Singh

भोजपुरी स्टार पवन सिंह-अक्षरा सिंह का गहरा अतीत, पत्नी ज्योति ने खोले कई राज़

भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह की निजी जिंदगी हमेशा सुर्खियों में रही है। हाल ही में, उनकी पत्नी ज्योति सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन और अभिनेत्री अक्षरा सिंह के रिश्ते को लेकर सनसनीखेज खुलासा किया है। पवन सिंह और अक्षरा सिंह का नाम भोजपुरी इंडस्ट्री में एक चर्चित जोड़ी के रूप में लिया जाता है। दोनों के बीच एक समय गहरी दोस्ती और करीबी रिश्ते थे, जो मीडिया में भी चर्चा का विषय बने रहे। हालांकि, यह रिश्ता शादी तक नहीं पहुंच सका और दोनों के बीच ब्रेकअप हो गया। ज्योति सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मैंने पवन जी से कभी भी उनके अन्य रिश्तों के बारे में सवाल नहीं किया। जब हमारी शादी हुई, तो हमारे पिता ने कहा था कि बेटा, आपकी शादी एक स्टार से हो रही है, आपको थोड़ा बहुत समझौता करना पड़ेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि शादी के कुछ महीनों बाद तक पवन और अक्षरा एक साथ थे, लेकिन इसके बाद उनका रिश्ता खत्म हो गया। ज्योति ने यह भी आरोप लगाया कि पवन सिंह ने कई महिलाओं के साथ रिश्ते बनाए हैं और उन्होंने वही सब झेला है जो ज्योति ने झेला। इस बयान से पवन सिंह की छवि पर सवाल उठ रहे हैं। पवन सिंह की निजी जिंदगी में चल रहे विवादों ने उनके करियर और छवि को प्रभावित किया है। भोजपुरी सिनेमा के फैंस इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं और देखना होगा कि पवन सिंह इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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Pawan Singh and jyoti singh

पवन सिंह-ज्योति के विवाद ने बढ़ाई टेंशन, खेसारी लाल यादव बोले- भाभी का इतना बड़ा अपराध नहीं

भोजपुरी सिनेमा की चर्चित जोड़ी पवन सिंह और ज्योति सिंह के बीच विवाद एक बार फिर गरमाया है। सोशल मीडिया पर ज्योति सिंह ने एक ऐसा वीडियो शेयर किया जिसने सभी को चौंका दिया। वीडियो में वह रोती हुई नज़र आईं और कहा, “मैं इसी घर में जहर खाकर मर जाऊंगी… अगर थाने गई तो यहीं से लाश निकलवाना।” मामला तब और तूल पकड़ गया, जब पवन के घर में ज्योति के प्रवेश को मना कर दिया गया। ज्योति ने दावा किया कि उन्होंने फैंस के कहने पर पवन से मिलने के लिए लखनऊ स्थित घर पहुँची थीं, लेकिन उन्हें अंदर जाने नहीं दिया गया। उन्होंने ये नजारा लाइव वीडियो में दिखाया और आरोप लगाया कि पवन ने उनके खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। इस बीच, विवाद पर भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव ने अपनी प्रतिक्रिया दी और ज्योति का बचाव किया। उन्होंने कहा, “भाभी का इतना बड़ा अपराध तो नहीं है … अगर उनकी गलती है, तो एक बार खुद मीडिया में आकर बोलो। खेसारी ने पवन को निशाने पर रखते हुए पूछा कि वे अब तक कितने गिर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे पवन को पसंद करते हैं, लेकिन उनकी गलतियों पर भी पर्दा नहीं डालेंगे। वर्तमान में विवाद की जड़ तक पहुँचने के लिए पूरी जांच की उम्मीद की जा रही है। पवन-ज्योति के बीच का रिश्ते, सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप और खेसारी की दखल ने इस विवाद को और भी जटिल बना दिया है। दर्शकों की निगाह अब यह जानने पर लगी है कि इस विवाद का अगला अध्याय कैसे लिखा जाएगा।

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Rashmika Mandanna and Vijay Deverakonda got engaged

रश्मिका मंदाना-विजय देवरकोंडा ने की सगाई, गीता गोविंदम फिल्म से शुरू हुआ था प्यार का खुबसूरत सफर

साउथ फिल्म इंडस्ट्री के दो चमकते सितारे रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने लंबे समय की अफवाहों के बाद आखिरकार अपने रिश्ते को अगले मुकाम पर ले जाकर गुपचुप तरीके से सगाई कर ली है। यह खबर फैंस के लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं है।रश्मिका और विजय की कहानी की शुरुआत साल 2018 में आई फिल्म ‘गीता गोविंदम’ से मानी जाती है, जिसमें दोनों ने साथ काम किया। उस समय दोनों के बीच ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया। हालांकि उस समय रश्मिका की सगाई उनके एक पुराने को-स्टार से भी जुड़ी थी, लेकिन बाद में वह रिश्ता टूट गया। इसी बीच रश्मिका और विजय के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। इसके बाद दोनों ‘डियर कॉमरेड’ जैसी फिल्मों में भी साथ आए और धीरे-धीरे उनकी दोस्ती गहरी होती गई। कई मौकों पर दोनों को साथ वक्त बिताते, ट्रैवल करते और इवेंट्स में नजर आते देखा गया। फैंस ने उनकी यारी को प्यार मान लिया और शादी की उम्मीद भी जताई। हाल ही में खबर आई कि रश्मिका और विजय ने पूरी प्राइवेट तरीके से हैदराबाद में विजय के घर पर सिर्फ करीबी परिवार और दोस्तों की मौजूदगी में सगाई की रस्म पूरी की। इस समारोह में दोनों ने एक-दूसरे को अंगूठी पहनाई और जिंदगी भर साथ निभाने का वादा किया। हालांकि दोनों ने अभी तक इस खबर की कोई आधिकारिक पुष्टि या तस्वीरें साझा नहीं की हैं। सूत्रों के मुताबिक, रश्मिका और विजय फरवरी 2026 में शादी के बंधन में बंधेंगे। यह खुशखबरी फैंस के लिए बड़ी साबित हुई है, जो लंबे समय से इस जोड़ी को शादी करते देखने के लिए उत्सुक थे। कम लोग जानते हैं कि रश्मिका मंदाना ने इससे पहले भी साउथ के अन्य अभिनेता रक्षित शेट्टी से सगाई की थी। 2016 में रक्षित के साथ उनकी पहली फिल्म ‘करिक पार्टी’ आई थी, जिसके दौरान उनकी नजदीकियां बढ़ीं और उन्होंने सगाई कर ली। हालांकि कुछ समय बाद उनका रिश्ता टूट गया। इसके बाद रश्मिका ने विजय के साथ नए अध्याय की शुरुआत की।

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Pawan Singh

पहले सिंगर थे, अब नेता हो गए हैं; पवन सिंह की बीजेपी में वापसी पर बोले खेसारी लाल यादव

भोजपुरी इंडस्ट्री के सुपरस्टार और गायक पवन सिंह एक बार फिर सियासी चर्चाओं में आ गए हैं। हाल ही में उनकी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में वापसी की खबर सामने आई, जिसके बाद से राजनीति और भोजपुरी सिनेमा दोनों ही गलियारों में हलचल मच गई है। पवन सिंह ने जब से राजनीति में कदम रखा है, तब से वे सुर्खियों का हिस्सा बने रहते हैं। कभी अपने गानों से लोगों का दिल जीतने वाले पवन अब सीधे तौर पर सियासी मंच से जनता के बीच पहुंच रहे हैं। इस बीच, भोजपुरी के ही दूसरे स्टार खेसारी लाल यादव ने पवन सिंह की बीजेपी जॉइनिंग और राजनीति में सक्रियता पर अपनी प्रतिक्रिया दी। खेसारी ने कहा कि “हर इंसान को अपने जीवन में आगे बढ़ने और नए रास्ते चुनने का अधिकार है। पवन भैया ने अगर राजनीति का रास्ता चुना है तो यह उनका फैसला है और हम सबको उसका सम्मान करना चाहिए।” खेसारी ने यह भी कहा कि पवन सिंह एक बड़े कलाकार हैं, और अब राजनीति में भी वह अपनी पहचान बनाएंगे भोजपुरी इंडस्ट्री में पवन और खेसारी की टक्कर अक्सर सुर्खियों में रहती है। गानों से लेकर फैन फॉलोइंग तक दोनों की तुलना होती रही है। लेकिन पवन सिंह के राजनीतिक कदम पर खेसारी का यह बयान साफ करता है कि इंडस्ट्री के स्टार्स व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर एक-दूसरे के फैसले का सम्मान करते हैं। पवन सिंह की बीजेपी में वापसी से राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ना तय है। खासकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश जैसे इलाकों में, जहां उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें जनता से जोड़ने के लिए एक मजबूत चेहरा बना सकती है। फिलहाल, पवन सिंह के चाहने वाले भी इस नई पारी को लेकर उत्साहित हैं। एक दौर में उनके गाने और फिल्मों ने दर्शकों के दिलों पर राज किया, और अब देखना होगा कि राजनीति के मैदान में उनका करियर कैसा रहता है। by shruti kumari

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 42 की उम्र में मां बनेंगी कटरीना कैफ, इस उम्र में कितना मुश्किल होता है मां बनना?

बॉलीवुड एक्ट्रेस कटरीना कैफ के 42 साल की उम्र में मां बनने की खबरें सुर्खियों में हैं। जहां यह एक खुशी की बात है, वहीं देर से मां बनने से जुड़ी कई चुनौतियां भी होती हैं। आजकल कैरियर, लाइफस्टाइल और पर्सनल प्लानिंग के कारण महिलाएं देर से शादी और मातृत्व का फैसला ले रही हैं। लेकिन मेडिकल साइंस बताता है कि 40 की उम्र के बाद प्रेग्नेंसी उतनी आसान नहीं होती। क्यों मुश्किल हो जाता है देर से मां बनना? प्रजनन क्षमता कम होना (Fertility Decline)35 साल के बाद महिलाओं के अंडाणुओं (eggs) की क्वालिटी और संख्या दोनों घटने लगती है। 40 के बाद नेचुरल कंसीव करना काफी कठिन हो जाता है। ज्यादा हेल्थ रिस्कदेर से मां बनने पर गर्भपात (miscarriage), ब्लड प्रेशर, गर्भावधि मधुमेह (gestational diabetes), और समय से पहले डिलीवरी का खतरा ज्यादा रहता है। बच्चे पर असरइस उम्र में बच्चे में क्रोमोसोमल समस्याओं (जैसे डाउन सिंड्रोम) का रिस्क भी बढ़ जाता है। IVF और मेडिकल तकनीक पर निर्भरताकई महिलाएं देर से मां बनने के लिए IVF, Egg Freezing या Donor Eggs जैसी तकनीकों का सहारा लेती हैं। ये तकनीकें मदद तो करती हैं, लेकिन मानसिक, शारीरिक और आर्थिक तौर पर थकाऊ हो सकती हैं। फायदे भी हैं देर से मां बनने के इस उम्र तक महिलाएं आम तौर पर आर्थिक और मानसिक रूप से ज्यादा स्थिर होती हैं। करियर और पर्सनल गोल सेट करने के बाद मां बनने का अनुभव और भी संतुलित हो सकता है।रिसर्च के अनुसार, 40 की उम्र में मां बनने वाली महिलाएं बच्चों की परवरिश में ज्यादा धैर्य और समझदारी दिखाती हैं। क्या करें महिलाएं? 35 के बाद प्रेग्नेंसी प्लान कर रही महिलाओं को नियमित हेल्थ चेकअप और डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। लाइफस्टाइल हेल्दी रखना जरूरी है – संतुलित आहार, योग, और तनाव कम करना गर्भधारण की संभावना बढ़ाता है। जरूरत पड़ने पर प्रजनन विशेषज्ञ (fertility expert) से समय पर परामर्श लेना चाहिए। BY SHRUTI KUMARI

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