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फिल्म और टीवी जगत के दिग्गज कॉमेडियन सतीश शाह का निधन, इंडस्ट्री में शोक की लहर

डेस्क रिपोर्ट : विजय तिवारी मुंबई : हिंदी सिनेमा और टेलीविजन की दुनिया के मशहूर अभिनेता और हास्य के बादशाह सतीश शाह अब हमारे बीच नहीं रहे। 74 वर्षीय सतीश शाह का 25 अक्टूबर को मुंबई में किडनी फेलियर के चलते निधन हो गया। उनके अचानक चले जाने से फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में गहरा शोक छा गया है। शुरुआती जीवन और शिक्षा सतीश शाह का जन्म 1951 में हुआ था। वे बचपन से ही अभिनय और कला के प्रति रुचि रखते थे। उनके परिवार ने भी उनका हौसला बढ़ाया और उन्होंनें अपने अभिनय का प्रशिक्षण थिएटर के माध्यम से प्राप्त किया। मुंबई आने से पहले उन्होंने छोटे मंचों और कॉलेज थिएटर में अभिनय किया, जहां उनकी कॉमिक प्रतिभा और सहज हाव-भाव ने दर्शकों का दिल जीत लिया। थिएटर और टीवी में करियर सतीश शाह का करियर थिएटर से शुरू हुआ, लेकिन उन्हें असली पहचान टीवी शो ‘ये जो है ज़िंदगी’ से मिली। इस शो में उनका किरदार दर्शकों के बीच घर-घर में लोकप्रिय हुआ। उन्होंने ‘हम पांच’, ‘हम सब’, ‘फ्लाइंग किचन’, और ‘ज्वेल्स ऑफ द इंडिया’ जैसे कई शो में भी अभिनय किया। उनकी कॉमिक टाइमिंग इतनी लाजवाब थी कि गंभीर सीन में भी दर्शक उनके अभिनय पर हंसते बिना नहीं रह पाते थे। वे हमेशा अपने किरदारों में प्राकृतिक हास्य और सहजता बनाए रखते थे, जिससे उनके अभिनय में कोई बनावट नहीं दिखती थी। फिल्मी करियर सतीश शाह ने फिल्मों में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने ‘जाने भी दो यारो’, ‘मैं हूँ ना’, ‘ओम शांति ओम’, ‘कल हो ना हो’, और ‘3 इडियट्स’ जैसी हिट फिल्मों में अभिनय किया। ‘जाने भी दो यारो’ में उनका हास्यप्रधान किरदार आज भी सिनेमाप्रेमियों के लिए यादगार है। ‘ओम शांति ओम’ में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के पर्दे के पीछे की राजनीति और जटिलताओं को अपनी अदाकारी से जीवंत किया। ‘3 इडियट्स’ और ‘कल हो ना हो’ में उनके छोटे पर प्रभावशाली किरदार ने दर्शकों को हंसाया और भावविभोर किया। सतीश शाह की हर फिल्म और शो में योगदान केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था, वे अपने किरदारों में जीवन की सादगी और मानवीय भावनाओं को जीवंत करते थे। उनके डायलॉग और हल्के-फुल्के हास्य संवाद आज भी लोगों की यादों में ताजा हैं। सहयोग और सम्मान सतीश शाह ने न केवल कॉमिक किरदार निभाए, बल्कि नए कलाकारों को मार्गदर्शन देने में भी पीछे नहीं रहे। उनके साथी कलाकार और फिल्ममेकर उन्हें समर्पित और मेहनती कलाकार के रूप में याद करते हैं। फिल्ममेकर अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर उनके निधन की पुष्टि करते हुए कहा, “सतीश भाई ने हर किरदार को दिल से निभाया। उनके जाने से इंडस्ट्री ने सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि एक आत्मा खो दी।” सोशल मीडिया पर बॉलीवुड के दिग्गजों ने भी भाव व्यक्त किए। अभिनेता अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, जॉनी लीवर सहित कई कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया। व्यक्तिगत जीवन और विरासत सतीश शाह का व्यक्तित्व बहुत सरल और मिलनसार था। वे अपने सहकर्मियों और सह-अभिनेताओं के बीच हमेशा मित्रवत और सहयोगी बने। उनकी हास्य कला ने कई पीढ़ियों को प्रभावित किया और मनोरंजन की दुनिया में उनका योगदान अमूल्य रहा। सतीश शाह की कॉमिक टाइमिंग, सहज अभिनय और यादगार किरदारों ने उन्हें दर्शकों के दिल में हमेशा के लिए अमर बना दिया। उनका जाना हिंदी सिनेमा और टीवी इंडस्ट्री के लिए अपूरणीय क्षति है।

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Aspak Khan

अभिनय की दुनिया में उभरता सितारा अस्पाक खांन जिसने फिल्म इंडस्ट्री में बनाई अपने दम पर पहचान

हर सपने की शुरुआत एक छोटी सी चिंगारी से होती है, और अस्पाक खांन के लिए यह चिंगारी बचपन में जली जब उन्होंने अपने पसंदीदा अभिनेताओं को पर्दे पर अभिनय करते देखा। फिल्मों और सीरियल्स के प्रति उनका लगाव इतना गहरा था कि अभिनय उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया। अस्पाक कहते हैं “जब अपने फेवरेट एक्टर को अभिनय करते और गानों पर थिरकते देखा, तो वहीं से अभिनय करने की प्रेरणा मिली। करियर चुनने का समय आया तो उन्होंने खुद से वादा किया कि अब हर कदम एक्टिंग की दिशा में ही बढ़ेगा। यूट्यूब पर संघर्षरत कलाकारों की कहानियाँ पढ़कर उन्हें यकीन हुआ कि मेहनत और जुनून से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। उनका पहला ब्रेक “कामधेनु गौ माता” सीरियल से मिला। रात के डेढ़ बजे जब कास्टिंग डायरेक्टर संतोष त्रिपाठी ने उन्हें सिलेक्शन की खबर दी, तो वह पल उनके लिए किसी सपने से कम नहीं था। गाँव के एक साधारण युवक के लिए यह एहसास जादुई था वह अब उस दुनिया में कदम रखने वाला था, जिसे वह बरसों से कल्पनाओं में जी रहा था। अस्पाक की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ भी आया जिसने उन्हें भीतर तक बदल दिया। झांसी में थिएटर और फोटोग्राफी करते हुए एक पुलिस केस ने उन्हें गाँव छोड़ने पर मजबूर कर दिया। घर से भागकर मुंबई पहुंचे तो उन्होंने संघर्ष की पराकाष्ठा देखी कई रातें सड़कों पर बिताईं, भूखे सोए, और फिर भी अपने सपनो के तीछे लगे रहे। उसी समय उन्होंने सीखा कि दुनिया आपकी अच्छाइयाँ नहीं, बस आपकी गलतियाँ याद रखती है। सेट पर पहला दिन उनके लिए सपनों जैसा था। कैमरे के सामने खड़ा होकर उन्होंने महसूस किया कि आपकी मेहनत हमेशा काम आती है। अब उनका सपना है किसी वीर योद्धा का किरदार निभाना — जिसमें ताकत, साहस और देशभक्ति झलके। वर्तमान में वे फिल्म “अघोरम” में एक कांस्टेबल की भूमिका निभा रहे हैं और साथ ही एक वेब सीरीज़ पर भी काम कर रहे हैं। अगले पाँच सालों में वे खुद को बड़े प्रोडक्शन हाउस की फिल्मों में लीड एक्टर के रूप में देखते हैं। अस्पाक खांन की कहानी इस बात का प्रमाण है कि अगर हौसले बुलंद हों और जुनून सच्चा, तो मंज़िल खुद चलकर आपके कदमों में आती है। लेखक संपादक राहुल कुमार शुक्ला

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ऋषि कपूर को याद कर इमोशनल हुए रणबीर कपूर, बोले– “ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब पापा याद न आते हों”

बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर ने एक हालिया कार्यक्रम में अपने पिता ऋषि कपूर को याद करते हुए भावुक कर देने वाली बातें कहीं। अपने शानदार अभिनय और विनम्र स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले रणबीर ने कहा कि भले ही उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी आज भी उनके दिल और काम में महसूस होती है। मुंबई में आयोजित एक फिल्म प्रमोशन इवेंट के दौरान जब पत्रकारों ने रणबीर से उनके पिता की कोई यादगार बात पूछी, तो वे कुछ पल के लिए रुक गए। आंखों में नमी लिए रणबीर बोले, “ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब मैं पापा को याद न करता हूं। वो मेरे जीवन के सबसे बड़े प्रेरणास्त्रोत थे। उनकी डांट भी प्यार भरी होती थी, और उनका गुस्सा भी मुझे आगे बढ़ने की ताकत देता था।” ऋषि कपूर का निधन 30 अप्रैल 2020 को हुआ था, लेकिन उनके चाहने वालों और परिवार के लिए वह आज भी जिंदा हैं। रणबीर ने आगे कहा, “जब भी किसी सीन के लिए कैमरे के सामने खड़ा होता हूं, तो ऐसा लगता है जैसे पापा वहीं कहीं खड़े होकर देख रहे हों। उनकी आवाज अब भी कानों में गूंजती है – ‘एक्सप्रेशन में सच्चाई रखो, ओवरएक्ट मत करो।’” रणबीर ने बताया कि उनके पिता हमेशा चाहते थे कि वह अपनी पहचान खुद बनाएं, न कि केवल कपूर खानदान के वारिस के रूप में। उन्होंने कहा, “पापा ने कभी आसान रास्ता नहीं दिखाया। वे चाहते थे कि मैं अपनी गलतियों से सीखूं। आज अगर लोग मुझे एक अच्छा अभिनेता मानते हैं, तो उसमें उनका सबसे बड़ा योगदान है।” इवेंट के दौरान मौजूद दर्शकों ने रणबीर की बातों पर तालियां बजाईं, जबकि खुद रणबीर कुछ देर के लिए भावुक होकर चुप हो गए। उन्होंने बताया कि अपनी आने वाली फिल्म ‘दिल की कहानी’ को उन्होंने अपने पिता को समर्पित किया है। उनके अनुसार, यह फिल्म उस रिश्ते को दर्शाती है जहां पिता और बेटे के बीच भावनाओं का संघर्ष और गहरा प्यार दोनों मौजूद होते हैं। रणबीर ने यह भी कहा कि वे अक्सर ऋषि कपूर की पुरानी फिल्में देखते हैं और उनके अभिनय से आज भी प्रेरणा लेते हैं। “जब मैं ‘बॉबी’, ‘चांदनी’ या ‘कर्ज़’ देखता हूं, तो समझ आता है कि उन्होंने अपने समय में कितना नया प्रयोग किया था। मैं उनके जैसा तो नहीं बन सकता, लेकिन कोशिश जरूर करता हूं कि वो मुझ पर गर्व करें।” कार्यक्रम के अंत में रणबीर ने कहा, “पापा ने सिखाया कि जिंदगी में सच्चा बनना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है। वो भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका प्यार और सीख हर कदम पर साथ है।” रणबीर की यह भावनात्मक यादें सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। यह लम्हा एक बार फिर साबित कर गया कि पिता और बेटे का रिश्ता सिर्फ खून का नहीं, बल्कि आत्मा का बंधन होता है—जो मौत के बाद भी कभी खत्म नहीं होता। by shruti kumari

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Filmfare Awards 2025: 25 साल बाद अभिषेक बच्चन बने ‘बेस्ट एक्टर’, ‘लापता लेडीज’ के नाम रही शाम

मुंबई में रविवार रात आयोजित हुए फिल्मफेयर अवॉर्ड्स 2025 ने बॉलीवुड के सितारों से सजी शाम को यादगार बना दिया। इस बार का अवॉर्ड समारोह कई मायनों में खास रहा—क्योंकि 25 साल बाद अभिषेक बच्चन ने अपने करियर का सबसे बड़ा अवॉर्ड अपने नाम किया। वहीं, कास्टिंग और कहानी के दम पर छाई रही फिल्म ‘लापता लेडीज’ ने इस साल के अधिकतर अवॉर्ड्स अपने नाम कर लिए। फिल्मफेयर की इस चमकदार शाम में फिल्म इंडस्ट्री के लगभग सभी बड़े सितारे शामिल हुए। रेड कार्पेट पर दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, आलिया भट्ट, वरुण धवन, कृति सेनन, और अनन्या पांडे जैसे स्टार्स ने अपने लुक्स से सबका दिल जीत लिया। लेकिन रात की असली चर्चा उस वक्त हुई जब बेस्ट एक्टर की ट्रॉफी अभिषेक बच्चन के हाथों में आई। अभिषेक ने अपनी फिल्म ‘गुरुदक्षिणा’ के लिए बेस्ट एक्टर (क्रिटिक्स) का खिताब जीता। यह फिल्म एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो सामाजिक अन्याय और निजी संघर्षों से जूझते हुए अपनी पहचान बनाता है। मंच पर अवॉर्ड लेते हुए अभिषेक ने भावुक होकर कहा, “25 साल का सफर आसान नहीं रहा। कई बार गिरा, कई बार संभला, लेकिन दर्शकों ने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा। यह अवॉर्ड मेरे पिता को समर्पित है, जिन्होंने मुझे सिखाया कि असफलता ही सफलता का पहला कदम होती है।” वहीं, ‘लापता लेडीज’ ने इस बार अवॉर्ड्स की झड़ी लगा दी। कियारा कश्यप के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट स्क्रीनप्ले और बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस जैसे कई बड़े अवॉर्ड्स जीते। यह फिल्म समाज की पितृसत्तात्मक सोच और महिला सशक्तिकरण पर आधारित है, जिसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने खूब सराहा। बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड विद्या बालन को उनकी फिल्म ‘काफिला’ के लिए मिला, जिसमें उन्होंने एक पत्रकार की भूमिका निभाई जो सच्चाई की तलाश में अपने जीवन को दांव पर लगा देती है। विद्या ने अपने भाषण में कहा, “असली अवॉर्ड तब मिलता है जब दर्शक थिएटर से सोच में डूबकर बाहर निकलें।” इसके अलावा बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का अवॉर्ड प्रीतम को फिल्म ‘दिल से दिल्ली’ के लिए मिला, जबकि बेस्ट लिरिक्स का खिताब गुलज़ार साहब को उनकी कवितामय पंक्तियों के लिए दिया गया। फिल्मफेयर 2025 की यह शाम न केवल सितारों की मौजूदगी से जगमगा उठी, बल्कि इसने एक संदेश भी दिया—कि बॉलीवुड में फिर से कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा का दौर लौट आया है। दर्शक अब सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि असली कहानियों की तलाश में हैं। रात के अंत में जब पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गूंज से भर उठा, तो साफ हो गया कि यह शाम अभिषेक बच्चन और ‘लापता लेडीज’ के नाम रही। यह फिल्मफेयर अवॉर्ड्स याद किए जाएंगे एक नए युग की शुरुआत के रूप में—जहां मेहनत, लगन और सच्ची कहानी कहने की कला ने फिर से अपनी पहचान बनाई। BY SHRUTI KUAMRI

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‘मौत वाले दिन क्या…’ Zubeen Garg की पत्नी गरिमा सैकिया का दावा, सिंगर ने पीएसओ को दिए थे पैसे

असम के मशहूर सिंगर और एक्टर ज़ुबिन गर्ग की मौत के बाद अब मामला नया मोड़ लेता दिख रहा है। उनकी पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने एक चौंकाने वाला दावा किया है, जिसने फैंस और जांच एजेंसियों दोनों को हैरान कर दिया है। गरिमा के मुताबिक, ज़ुबिन गर्ग ने अपनी मौत वाले दिन अपने निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) को पैसे दिए थे — लेकिन अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि वह रकम किस मकसद से दी गई थी। गरिमा ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मौत वाले दिन क्या हुआ, यह सबको पता चलना चाहिए। ज़ुबिन बहुत शांत थे, लेकिन उन्होंने अचानक अपने पीएसओ को कुछ पैसे दिए और कहा कि इसे सही जगह पहुंचा देना। इसके कुछ घंटे बाद ही वह हमें छोड़ गए।” इस बयान ने सोशल मीडिया पर सनसनी फैला दी है, क्योंकि इससे पहले ज़ुबिन की मौत को एक सामान्य हार्ट अटैक बताया गया था। ज़ुबिन गर्ग असमिया और हिंदी संगीत इंडस्ट्री के बड़े नामों में गिने जाते थे। उन्होंने “या अली”, “दिल तू ही बता”, और “मोइनाज़ बैंड” जैसे कई हिट गाने दिए थे। उनकी अचानक हुई मौत से फैंस सदमे में हैं, लेकिन अब पत्नी के इस दावे ने पूरे मामले को सस्पेंस से भर दिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ज़ुबिन गर्ग की मौत के बाद उनके घर से कुछ निजी दस्तावेज़ और लेनदेन से जुड़ी जानकारी जब्त की गई थी। हालांकि, अब गरिमा के बयान के बाद जांच टीम दोबारा वित्तीय लेनदेन की दिशा में जांच आगे बढ़ा रही है। पीएसओ से भी पूछताछ की जा रही है कि आखिर ज़ुबिन ने उसे पैसे क्यों दिए थे और वह रकम कहाँ पहुंचाई गई। वहीं, ज़ुबिन के करीबी दोस्तों का कहना है कि सिंगर पिछले कुछ दिनों से मानसिक रूप से परेशान थे। कई बार उन्होंने अपने करीबियों से कहा था कि वे कुछ लोगों पर भरोसा नहीं कर पा रहे। गरिमा का दावा इस बात की ओर इशारा करता है कि उनकी मौत से पहले कुछ अनसुलझे हालात जरूर थे। फैंस सोशल मीडिया पर न्याय की मांग कर रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि ज़ुबिन जैसे बड़े कलाकार की मौत के बाद पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए, ताकि कोई शक या भ्रम बाकी न रहे। फिलहाल, पुलिस ने कहा है कि जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाएगी। गरिमा सैकिया के बयान के बाद अब यह मामला सिर्फ एक “हार्ट अटैक केस” नहीं रह गया — बल्कि यह एक ऐसा रहस्य बन चुका है, जिसने पूरे असम को झकझोर दिया है। by shruti kumari

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सोढ़ी पाजी की तारक मेहता का उल्टा चश्मा में वापसी? गुरुचरण सिंह ने दी बड़ी गुड न्यूज़!

‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ यानी TMKOC, भारत का सबसे लोकप्रिय टीवी शो, हमेशा से ही अपने मजेदार किरदारों और दिल छू लेने वाली कहानियों के लिए जाना जाता रहा है। इन किरदारों में से एक सबसे यादगार और फैंस के बीच सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला नाम है सोढ़ी पाजी, जिसे निभाते थे गुरुचरण सिंह। उनके हास्य और एनर्जी ने गोकुलधाम सोसाइटी को हमेशा रंगीन बना रखा था। हालांकि, कुछ साल पहले गुरुचरण सिंह ने शो छोड़ दिया था, जिससे फैंस में थोड़ी निराशा भी हुई थी। लेकिन अब उनके फैंस के लिए खुशखबरी आ रही है। गुरुचरण ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा कि बहुत जल्द वे सभी को एक बड़ी गुड न्यूज़ देने वाले हैं। उन्होंने वीडियो में ये भी कहा कि “बाबा जी ने मेरी, मेरी फैमिली की और आप सबकी अरदास सुन ली है। बहुत जल्द मैं आप सबको खुशखबरी दूंगा।” इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर फैंस काफी उत्साहित हैं। हर कोई ये अनुमान लगा रहा है कि गुरुचरण सिंह फिर से ‘सोढ़ी पाजी’ के रूप में टीवी पर लौट सकते हैं। उनका ये छोटा सा वीडियो ही काफी था कि फैंस के बीच चर्चा और उम्मीद की लहर फैल गई। लोग कमेंट कर रहे हैं कि “सोढ़ी पाजी, हम आपका इंतजार कर रहे हैं!” और “अब गोकुलधाम में फिर मज़ा आएगा!” हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि गुरुचरण सिंह पूरी तरह से शो में वापसी करेंगे या किसी नए प्रोजेक्ट के लिए तैयार हैं। उन्होंने वीडियो में साफ तौर पर यह नहीं बताया कि उनकी गुड न्यूज़ सीधे TMKOC से संबंधित है या नहीं। लेकिन फैंस की एक्साइटमेंट देखकर यही लग रहा है कि उनकी वापसी लगभग तय लग रही है। अभी फैंस का ध्यान पूरी तरह से गुरुचरण सिंह की अगली घोषणा पर है। सोशल मीडिया पर लोग उनके वीडियो को शेयर कर रहे हैं और कमेंट कर रहे हैं कि जल्दी ही उनकी वापसी होनी चाहिए। यह देखना भी दिलचस्प होगा कि उनका रोल अब कैसे दिखेगा और क्या कहानी में कोई नया ट्विस्ट आएगा।

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कॉमेडियन Bharti Singh बनीं दोबारा मां, खूबसूरत तस्वीर के साथ दी खुशखबरी!

Bharti Singh: टीवी की मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह (Bharti Singh) ने एक बार फिर फैंस को खुशखबरी दी है। भारती ने अपने दूसरे बच्चे की प्रेग्नेंसी की अनाउंसमेंट सोशल मीडिया पर एक बेहद खूबसूरत तस्वीर शेयर कर की है। तस्वीर में भारती अपने पति हर्ष लिंबाचिया (Haarsh Limbachiyaa) के साथ नजर आ रही हैं, दोनों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही है। भारती ने पोस्ट के साथ कैप्शन लिखा — “हमारा परिवार अब चार होने जा रहा है… आपका आशीर्वाद चाहिए।” बस फिर क्या था, कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़ आ गई। फैंस से लेकर सेलेब्स तक सभी ने कमेंट कर कपल को शुभकामनाएं दीं। भारती और हर्ष ने साल 2017 में शादी की थी। 2022 में दोनों अपने पहले बच्चे लक्ष्य (Golla) के माता-पिता बने थे। भारती अक्सर अपने यूट्यूब व्लॉग्स और इंस्टाग्राम रील्स में बेटे लक्ष्य के साथ मस्ती करते हुए दिखाई देती हैं।दूसरी बार मां बनने की खबर ने उनके फैंस को बेहद खुश कर दिया है। कॉमेडी की दुनिया में अपनी टाइमिंग और सेंस ऑफ ह्यूमर से लोगों का दिल जीतने वाली भारती अब एक बार फिर “मॉमी मोड” में जाने की तैयारी में हैं। कई फैंस ने कमेंट किया — “गोला को मिलने वाला है छोटा भाई या प्यारी बहन!” वहीं कुछ ने लिखा, “भारती फिर से मम्मी बनने वाली हैं, कितना प्यारा सरप्राइज है।” भारती सिंह की यह तस्वीर और खुशखबरी फिलहाल पूरे इंटरनेट पर ट्रेंड कर रही है, और फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं उनके “बेबी नंबर 2” के आने का।

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संजय दत्त को देखते ही पार्टी से रफूचक्कर हो गई थीं ये हीरोइन

मुंबई: बॉलीवुड के गलियारों में एक समय ऐसा भी था जब संजय दत्त और माधुरी दीक्षित की जोड़ी सिर्फ पर्दे पर ही नहीं, बल्कि रियल लाइफ में भी चर्चा का विषय बनी रहती थी। दोनों ने साथ में साजन, खलनायक जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया, और इसी दौरान उनकी नज़दीकियां भी खूब सुर्खियां बटोरीं। लेकिन अब इस रिश्ते से जुड़ा एक चौंकाने वाला खुलासा लेखक हनीफ जावेरी ने किया है। हनीफ जावेरी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि माधुरी दीक्षित ने संजय दत्त से रिश्ता खत्म करने के बाद उनसे पूरी तरह दूरी बना ली थी। उन्होंने बताया कि एक बार एक फिल्म पार्टी में जब माधुरी दीक्षित पहुंचीं और वहां संजय दत्त को देखा, तो वो बिना किसी से मिले सीधे वहां से चली गईं। हनीफ ने कहा, “माधुरी नहीं चाहती थीं कि उनके और संजय के बीच कोई और चर्चा हो। उन्होंने उस दौर में साफ कर दिया था कि वह उनके साथ फोटो तक नहीं खिंचवाना चाहतीं। यह उनका निजी फैसला था और उन्होंने खुद को पूरी तरह प्रोफेशनल तरीके से संभाला।” बताया जाता है कि 1993 में संजय दत्त का नाम मुंबई ब्लास्ट केस में आने के बाद दोनों का रिश्ता टूट गया था। माधुरी ने उस वक्त मीडिया से दूरी बना ली और फिल्मों में अपने काम पर ध्यान केंद्रित किया। वहीं, संजय दत्त ने भी अपनी जिंदगी को एक नई दिशा देने की कोशिश की। हालांकि, दोनों सितारों ने कभी अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया। लेकिन उनके बीच की केमिस्ट्री और अचानक आई दूरी ने फैंस को हमेशा अचरज में रखा। माधुरी दीक्षित और संजय दत्त की कहानी बॉलीवुड की उन अनकही कहानियों में से एक है, जो आज भी लोगों की दिलचस्पी का विषय बनी हुई है। वक्त बीत गया, दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए, लेकिन उनका नाम आज भी उस दौर की सबसे चर्चित जोड़ी के रूप में याद किया जाता है। by shruti kumari

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 42 की उम्र में मां बनेंगी कटरीना कैफ, इस उम्र में कितना मुश्किल होता है मां बनना?

बॉलीवुड एक्ट्रेस कटरीना कैफ के 42 साल की उम्र में मां बनने की खबरें सुर्खियों में हैं। जहां यह एक खुशी की बात है, वहीं देर से मां बनने से जुड़ी कई चुनौतियां भी होती हैं। आजकल कैरियर, लाइफस्टाइल और पर्सनल प्लानिंग के कारण महिलाएं देर से शादी और मातृत्व का फैसला ले रही हैं। लेकिन मेडिकल साइंस बताता है कि 40 की उम्र के बाद प्रेग्नेंसी उतनी आसान नहीं होती। क्यों मुश्किल हो जाता है देर से मां बनना? प्रजनन क्षमता कम होना (Fertility Decline)35 साल के बाद महिलाओं के अंडाणुओं (eggs) की क्वालिटी और संख्या दोनों घटने लगती है। 40 के बाद नेचुरल कंसीव करना काफी कठिन हो जाता है। ज्यादा हेल्थ रिस्कदेर से मां बनने पर गर्भपात (miscarriage), ब्लड प्रेशर, गर्भावधि मधुमेह (gestational diabetes), और समय से पहले डिलीवरी का खतरा ज्यादा रहता है। बच्चे पर असरइस उम्र में बच्चे में क्रोमोसोमल समस्याओं (जैसे डाउन सिंड्रोम) का रिस्क भी बढ़ जाता है। IVF और मेडिकल तकनीक पर निर्भरताकई महिलाएं देर से मां बनने के लिए IVF, Egg Freezing या Donor Eggs जैसी तकनीकों का सहारा लेती हैं। ये तकनीकें मदद तो करती हैं, लेकिन मानसिक, शारीरिक और आर्थिक तौर पर थकाऊ हो सकती हैं। फायदे भी हैं देर से मां बनने के इस उम्र तक महिलाएं आम तौर पर आर्थिक और मानसिक रूप से ज्यादा स्थिर होती हैं। करियर और पर्सनल गोल सेट करने के बाद मां बनने का अनुभव और भी संतुलित हो सकता है।रिसर्च के अनुसार, 40 की उम्र में मां बनने वाली महिलाएं बच्चों की परवरिश में ज्यादा धैर्य और समझदारी दिखाती हैं। क्या करें महिलाएं? 35 के बाद प्रेग्नेंसी प्लान कर रही महिलाओं को नियमित हेल्थ चेकअप और डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। लाइफस्टाइल हेल्दी रखना जरूरी है – संतुलित आहार, योग, और तनाव कम करना गर्भधारण की संभावना बढ़ाता है। जरूरत पड़ने पर प्रजनन विशेषज्ञ (fertility expert) से समय पर परामर्श लेना चाहिए। BY SHRUTI KUMARI

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मद्रासी OTT रिलीज़: सिनेमाघरों से घर-घर तक की यात्रा

तमिल सिनेमा की बहुप्रतीक्षित फिल्म “मधरासी” ने जब 5 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में दस्तक दी, तो दर्शकों के बीच मानो बिजली-सी दौड़ गई। निर्देशक ए.आर. मुरुगदॉस और अभिनेता सिवकार्तिकेयन की इस अनोखी जोड़ी ने एक ऐसा मनोवैज्ञानिक एक्शन थ्रिलर रचा, जिसने थिएटर में बैठे दर्शकों को हर मिनट कुर्सी से चिपकाए रखा। अब यही फिल्म एक नए पड़ाव की ओर बढ़ रही है—OTT प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़। यह वह सफ़र है जहाँ पर्दे का जादू अब मोबाइल और टीवी स्क्रीन तक पहुँचने वाला है। सिनेमाघरों का जुनून रघु नामक किरदार, जो मानसिक असामान्यताओं से जूझते हुए भी हथियारों की तस्करी करने वाले माफिया के खिलाफ खड़ा होता है, दर्शकों को न सिर्फ रोमांचित करता है बल्कि सोचने पर भी मजबूर करता है। 168 मिनट लंबी इस फिल्म ने एक्शन, सस्पेंस और भावनाओं के बीच ऐसी डोर बुनी कि दर्शक तालियों और सीटियों से थिएटर गूँजा उठे। थिएटर से निकलने वाले हर दर्शक के चेहरे पर एक ही सवाल था—अब यह फिल्म घर बैठे कब देख पाएँगे? और इसी सवाल का जवाब अब मिलने वाला है। OTT पर धमाका फिल्म मधरासी के डिजिटल अधिकार अमेज़न प्राइम वीडियो ने खरीदे हैं। यह फिल्म थिएटर के एक महीने बाद यानी 1 अक्टूबर 2025 को OTT पर रिलीज होगी। कुछ रिपोर्ट्स इसे 3 अक्टूबर भी मानती हैं, लेकिन इतना तय है कि अक्टूबर की शुरुआत में दर्शक इसे अपने घरों में देख सकेंगे। यह फिल्म न सिर्फ तमिल में बल्कि हिंदी, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ डब संस्करणों में भी उपलब्ध होगी। यानी भाषा की दीवार तोड़े बिना हर दर्शक इस रोमांचक सफ़र का हिस्सा बन सकेगा। पर्दे से स्क्रीन तक—एक अतिकाल “मधरासी” का सफ़र केवल एक फिल्म का सफ़र नहीं है, बल्कि यह सिनेमा के बदलते स्वरूप का भी प्रतीक है। पहले यह कहानी बड़े पर्दे पर उतरी, जहाँ सैकड़ों आँखें अंधेरे हाल में एक साथ इसे देख रही थीं। वहाँ हर एक्शन सीन पर सीटी बजती थी, हर इमोशनल मोड़ पर सन्नाटा छा जाता था। अब वही कहानी एक और यात्रा पर निकल पड़ी है—OTT की। यहाँ दर्शक अकेले या परिवार संग, घर की आरामदायक कुर्सी पर बैठकर इसे देखेंगे। यहाँ तालियाँ और सीटियाँ नहीं होंगी, लेकिन कहानी का असर वही होगा—दिल की धड़कनों में तेज़ी, आँखों में चमक और दिमाग में रहस्य की गुत्थी। दर्शकों की उम्मीदें OTT पर आने से “मधरासी” और भी व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुँचेगी। जो लोग थिएटर नहीं जा पाए, वे अब इसे आसानी से देख सकेंगे। साथ ही, फिल्म के एक्शन और सस्पेंस दृश्यों को बार-बार देखने का विकल्प भी मिलेगा। यह OTT रिलीज़ फिल्म के लिए दूसरी पारी साबित हो सकती है, जो बॉक्स ऑफिस से कहीं आगे तक जाएगी। मधरासी केवल एक तमिल फिल्म नहीं है, बल्कि यह आज के सिनेमा की बदलती तस्वीर का प्रतीक है। थिएटर से निकलकर जब यह फिल्म OTT पर पहुँचेगी, तो यह दिखाएगी कि असली जादू पर्दे का नहीं, कहानी का होता है। और अच्छी कहानियाँ हर प्लेटफ़ॉर्म पर अपना असर छोड़ जाती हैं। BY SHRUTI KUMARI

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