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 42 की उम्र में मां बनेंगी कटरीना कैफ, इस उम्र में कितना मुश्किल होता है मां बनना?

बॉलीवुड एक्ट्रेस कटरीना कैफ के 42 साल की उम्र में मां बनने की खबरें सुर्खियों में हैं। जहां यह एक खुशी की बात है, वहीं देर से मां बनने से जुड़ी कई चुनौतियां भी होती हैं। आजकल कैरियर, लाइफस्टाइल और पर्सनल प्लानिंग के कारण महिलाएं देर से शादी और मातृत्व का फैसला ले रही हैं। लेकिन मेडिकल साइंस बताता है कि 40 की उम्र के बाद प्रेग्नेंसी उतनी आसान नहीं होती। क्यों मुश्किल हो जाता है देर से मां बनना? प्रजनन क्षमता कम होना (Fertility Decline)35 साल के बाद महिलाओं के अंडाणुओं (eggs) की क्वालिटी और संख्या दोनों घटने लगती है। 40 के बाद नेचुरल कंसीव करना काफी कठिन हो जाता है। ज्यादा हेल्थ रिस्कदेर से मां बनने पर गर्भपात (miscarriage), ब्लड प्रेशर, गर्भावधि मधुमेह (gestational diabetes), और समय से पहले डिलीवरी का खतरा ज्यादा रहता है। बच्चे पर असरइस उम्र में बच्चे में क्रोमोसोमल समस्याओं (जैसे डाउन सिंड्रोम) का रिस्क भी बढ़ जाता है। IVF और मेडिकल तकनीक पर निर्भरताकई महिलाएं देर से मां बनने के लिए IVF, Egg Freezing या Donor Eggs जैसी तकनीकों का सहारा लेती हैं। ये तकनीकें मदद तो करती हैं, लेकिन मानसिक, शारीरिक और आर्थिक तौर पर थकाऊ हो सकती हैं। फायदे भी हैं देर से मां बनने के इस उम्र तक महिलाएं आम तौर पर आर्थिक और मानसिक रूप से ज्यादा स्थिर होती हैं। करियर और पर्सनल गोल सेट करने के बाद मां बनने का अनुभव और भी संतुलित हो सकता है।रिसर्च के अनुसार, 40 की उम्र में मां बनने वाली महिलाएं बच्चों की परवरिश में ज्यादा धैर्य और समझदारी दिखाती हैं। क्या करें महिलाएं? 35 के बाद प्रेग्नेंसी प्लान कर रही महिलाओं को नियमित हेल्थ चेकअप और डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। लाइफस्टाइल हेल्दी रखना जरूरी है – संतुलित आहार, योग, और तनाव कम करना गर्भधारण की संभावना बढ़ाता है। जरूरत पड़ने पर प्रजनन विशेषज्ञ (fertility expert) से समय पर परामर्श लेना चाहिए। BY SHRUTI KUMARI

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Kantara film

कांतारा चैप्टर 1 ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया धमाल, बॉलीवुड की इन फिल्मों को दी जबरदस्त मात

राइटर- दीपाक्षी शर्मा ऋषभ शेट्टी की फिल्म ‘कांतारा चैप्टर 1’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाकेदार शुरुआत कर दी है। रिलीज़ के पहले ही दिन फिल्म ने लगभग ₹60 करोड़ की कमाई की, जो इसे 2025 की सबसे बड़ी ओपनिंग में से एक बनाती है। इस फिल्म ने पहले दिन ही ‘कुली’ और ‘दे कॉल हिम ओजी’ जैसी बड़ी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया। फिल्म का हिंदी संस्करण भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा और इसने लगभग ₹20 करोड़ की कमाई की। कन्नड़ भाषा में रिलीज़ हुई इस फिल्म ने लगभग 88% ऑक्यूपेंसी के साथ 1500 शो पूरे किए। तेलुगु, तमिल और मलयालम में भी फिल्म को दर्शकों ने अच्छा रिस्पॉन्स दिया और सभी भाषाओं में 70% से अधिक सीटें भरी रहीं। वर्ल्डवाइड कुल कलेक्शन लगभग ₹85 करोड़ पहुंच गया, जिसमें भारत में ₹75 करोड़ और विदेशों से ₹10 करोड़ शामिल हैं। ‘कांतारा चैप्टर 1’ की कहानी कर्नाटक के तटीय इलाके की प्राचीन परंपराओं और भूत-प्रेत की कथाओं पर आधारित है। ऋषभ शेट्टी ने नाग साधू का किरदार निभाया है, जिसमें उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी, भावनात्मक गहराई और एक्शन सीन को दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा है। फिल्म ने कई रिकॉर्ड भी तोड़े हैं। यह 2025 की तीसरी सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्म बन गई है और हिंदी संस्करण की कमाई ने भी कई बॉलीवुड फिल्मों को टक्कर दी है। इसके अलावा, यह कन्नड़ फिल्म के तौर पर ‘KGF: Chapter 2’ के बाद दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग रही। फिल्म की शुरुआत इतनी मजबूत रही है कि उम्मीद की जा रही है कि यह जल्दी ही ₹100 करोड़ क्लब में शामिल हो जाएगी। इसके अलावा, फिल्म के क्लाइमेक्स में ‘कांतारा पार्ट 3’ का इशारा किया गया है, जिससे दर्शकों में अगले पार्ट को देखने की उत्सुकता और बढ़ गई है।

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Kumar Sanu

कुमार सानू ने पूर्व पत्नी को भेजा लीगल नोटिस, जानिए किस चीज को लेकर है पूरा विवाद

राइटर- दीपाक्षी शर्मा बॉलीवुड सिंगर कुमार सानू ने हाल ही में अपनी पूर्व पत्नी रीता भट्टाचार्य द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है और लीगल नोटिस भेजा है। कुछ दिन पहले रीता भट्टाचार्य ने मीडिया और इंटरव्यूज में दावा किया कि तीसरी प्रेग्नेंसी के दौरान कुमार सानू और उनके परिवार ने उन्हें खाने, दूध और ज़रूरी सुविधाओं से वंचित रखा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सानू और उनकी बहनों ने उनका अबॉर्शन करवाने की साजिश रची थी और तलाक की प्रक्रिया के दौरान आर्थिक व भावनात्मक कठिनाइयाँ झेलनी पड़ी। कुमार सानू की प्रतिक्रियाइन सभी आरोपों का कुमार सानू ने अपनी वकील सना रईस खान के ज़रिए कानूनी नोटिस भेजकर कड़े शब्दों में खंडन किया। वकील के अनुसार, कुमार सानू ने आरोपों को ‘दुर्भावनापूर्ण और झूठा’ बताया तथा अपनी गरिमा, विरासत और परिवार के सम्मान की रक्षा के लिए कानून का सामना करने की बात कही। उनका कहना है कि “कुछ झूठे शब्द थोड़ी देर के लिए शोर मचा सकते हैं, लेकिन वो एक कलाकार की विरासत नहीं मिटा सकते जिसने पीढ़ियों को संगीत और यादें दी हैं”। कुमार सानू और रीता भट्टाचार्य की शादी 1980 में हुई थी, लेकिन 1994 में दोनों अलग हो गए। पिछले कुछ वर्षों में दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चलता रहा है, पर हालिया आरोपों ने विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया।

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Bigg boss 19

Bigg Boss 19: फरहाना भट्ट ने अभिषेक बजाज पर फेंका पानी, घर में पैदा हुआ नया विवाद

राइटर- दीपाक्षी शर्मा बिग बॉस 19 के घर में कश्मीर की फरहाना भट्ट का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। अपनी कैप्टेंसी के दौरान, फरहाना का एग्रेसिव और स्ट्रॉन्ग व्यवहार घरवालों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही के एपिसोड में फरहाना और अभिषेक बजाज के बीच विवाद ने शो में नया मोड़ ला दिया है। मामला तब शुरू हुआ जब अभिषेक बजाज बेडरूम में सो रहे थे, जो बिग बॉस के नियमों के खिलाफ था। इस बात पर फरहाना ने बोतल से अभिषेक पर पानी फेंक दिया। अभिषेक इस हरकत से काफी नाराज हो गए और उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर उन्होंने बाल्टी से पानी नहीं मारा तो उनका नाम बजाज नहीं है। इस सिचुएशन में अशनूर, मृदुल, गौरव खन्ना और प्रणित समेत कई सदस्य फरहाना के विरोध में आ गए। फरहाना ने अभिषेक के विरोधी ग्रुप को सीधा चैलेंज दिया और साफ कर दिया कि वो किसी से डरती नहीं हैं। उन्होंने कहा—जो उनकी मर्जी होगी वही करेंगी। अशनूर ने जहां फरहाना के बर्ताव को गलत बताया, वहीं फरहाना ने अशनूर को अभिषेक की वॉचमैन बनने की सलाह दे डाली। दोनों के बीच राइजिंग टेंशन ने फैंस की एक्साइटमेंट और बढ़ा दी है। विलेन बनीं फरहाना, सोशल मीडिया पर ट्रोलफरहाना के निगेटिव और एग्रेसिव खेल के चलते उन्हें सोशल मीडिया पर घर का विलेन तक घोषित किया जा रहा है। पीस एक्टिविस्ट होने के बावजूद फरहाना का बदला हुआ अंदाज लोगों को हैरान कर रहा है। पिछले एपिसोड में उनकी कुनिका सदानंद से भी जोरदार लड़ाई हुई थी। अब घर में केवल कुछ चुनिंदा लोग जैसे नेहल ही उनसे पटती हैं। नेहल और फरहाना दोनों ही सीक्रेट रूम से होकर वापस शो में लौटी हैं।

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The immortal love story of the Kapoor family: Shashi Kapoor and Jennifer Kendal

कपूर खानदान की अमर प्रेम गाथा: शशि कपूर और जेनिफर केंडल

राइटर- विजय तिवारी बॉलीवुड और भारतीय थिएटर की दुनिया में शशि कपूर और जेनिफर केंडल की प्रेम कहानी एक प्रेरणादायक दंतकथा की तरह कही जाती है। यह केवल दो कलाकारों का मिलन नहीं है, बल्कि यह भारतीय सिनेमा और थिएटर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ भी है। उनकी जोड़ी ने पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन दोनों में कला और प्रेम की मिसाल कायम की।पहली मुलाकात और प्यार का आरंभ1956 में कोलकाता के रॉयल ओपेरा हाउस में शशि कपूर और जेनिफर केंडल की पहली मुलाकात हुई। उस समय शशि कपूर अपने पिता पृथ्वीराज कपूर की स्थापना ‘पृथ्वी थिएटर’ के साथ जुड़े हुए थे, जबकि जेनिफर अपने पिता जॉर्ज केंडल के ‘शेक्सपियराना’ थिएटर समूह के तहत अभिनय कर रही थीं। इस मुलाकात में शशि कपूर ने जेनिफर को पहली ही नजर में पसंद कर लिया। यह पहली झलक उनके जीवन का अहम मोड़ साबित हुई, जिसने आने वाले वर्षों में प्रेम, संघर्ष और कला का अद्भुत मिश्रण तैयार किया। विवाह और पारिवारिक संघर्ष धीरे-धीरे उनके बीच गहरा प्रेम विकसित हुआ और 1958 में दोनों ने शादी कर ली। उस समय शशि कपूर मात्र 20 वर्ष के थे और जेनिफर केंडल 25 वर्ष की थीं। उनकी शादी ने पारंपरिक सोच को चुनौती दी, क्योंकि जेनिफर विदेशी थीं और उनके परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया। लेकिन कपूर खानदान के भीतर, विशेषकर शशि की बहन गीता बाली ने उनका पूरा समर्थन किया, जिससे यह प्रेम कहानी हकीकत में बदल सकी। साझा जीवन और परिवार शशि और जेनिफर के संयुक्त जीवन से तीन संतानें हुईं—करण कपूर, कुनाल कपूर और संजना कपूर। सभी बच्चों ने अभिनय और थिएटर में योगदान दिया। खासकर संजना कपूर ने 1993 से 2012 तक मुंबई स्थित ‘पृथ्वी थिएटर’ का संचालन किया, जो शशि और जेनिफर की साझा कला और प्रेम की विरासत का प्रतीक है।जेनिफर के निधन का शोक1982 में जेनिफर केंडल को कोलन कैंसर का पता चला और 7 सितंबर 1984 को उनका निधन हो गया। शशि कपूर गहरे शोक में डूब गए। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, “मैंने जेनिफर से 100 सालों तक शादी की है।” यह कथन उनकी गहरी भावनाओं और जेनिफर के प्रति अटूट प्रेम का साक्ष्य है। फिल्मों और कला में योगदान शशि कपूर और जेनिफर केंडल ने कई फिल्मों में साथ अभिनय किया, जिनमें ‘36 चौरींगही लेन’ (1981), ‘बॉम्बे टॉकीज’ (1970), ‘जुनून’ (1978) और ‘हीट एंड डस्ट’ (1983) शामिल हैं। इन फिल्मों में उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब सराहा, और इसने भारतीय सिनेमा में उनका महत्वपूर्ण स्थान सुनिश्चित किया।कला और प्रेम की अमर विरासतशशि कपूर और जेनिफर केंडल की प्रेम कहानी सिर्फ व्यक्तिगत रिश्ते की नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा और थिएटर के इतिहास में एक प्रेरक अध्याय है। उनका साझा योगदान—‘पृथ्वी थिएटर’ आज भी कला और संस्कृति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सच्चा प्रेम किसी भी बाधा को पार कर सकता है और कला के प्रति समर्पण अनमोल होता है। देखी जाने वाली फिल्में और नाटक यदि आप शशि कपूर और जेनिफर केंडल की प्रेम कहानी और कला को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो ‘36 चौरींगही लेन’ और ‘बॉम्बे टॉकीज’ जैसी फिल्मों को अवश्य देखें। ये फिल्में न केवल उनकी अदाकारी की खूबसूरती को दिखाती हैं, बल्कि उनके जीवन और प्रेम की गहराई को भी जीवंत करती हैं।

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Vijay

करूर हादसा: विजय की रैली में भीड़ नियंत्रण फेल, 39 लोगों की मौत-51 घायल

तमिलनाडु के करूर में एक भयानक हादसा होता हुआ नजर आया है। एक्टर विजय की रैली में शनिवार के दिन शाम के वक्त भगदड़ मच गई। सीएम स्टालिन की माने तो इस हादसे में कम से कम 39 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इस हादसे में मरे गए लोगों की लिस्ट में 16 महिलाएं और 10 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा 51 लोग इस वक्त आईसीयू में भर्ती है। इस पूरे मामले में तमिलानाडु पुलिस ने बताया कि विजय की रैली के लिए 10 हजार लोगों की परमिशन मिली थी, लेकिन 1 लाख 20 हजार स्क्वायर फीट एरिया में 50 हजारा से अधिक लोग जमा हो गए। एक्टर रील में 6 घंटे देरी से पहुंचे। विजय को बताया गया था कि 9 साल की बच्ची गुम हो गई है। ऐसे में विजय ने मंच से ही उसे तलाशने की अपील की, जिसके बाद ये भगदड़ मच गई। इस पूरे मामले को लेकर सीएम एमके स्टालिन ने रात के वक्त ही हाइलेवल मीटिंग रख ली और देर रात को करूर जा पहुंचे। स्टालिन की तरफ से हॉस्पिटल जाकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी और घायलों से मुलाकात की है। इस पूरे मामले को लेकर गृह मंत्रालय की तरफ से रिपोर्ट मांगी गई है। हादसे के तुरंत बाद एक्टर विजय करूर से सीधे त्रिची एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से चेन्नई के लिए रवाना हो गाए। उन्होंने न तो घायलों से मुलाकात की और न ही सांत्वना दी। उन्होंने अपने एक्स पर लिखा- मेरी दिल टूट गया है। मैं बहुत दर्द और दुख महसूस कर रहा हूं। मैं करूर में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं और घायल लोगों के जल्दी ठीक होने की प्रार्थना करता हूं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शनिवार को विजय की दो रैलियां थीं। नमक्कल में सुबह 8:45 बजे सभा की अनुमति थी, लेकिन वे 2:45 बजे पहुंचे। तब तक धूप में भूखे-प्यासे लोग थककर गिरने लगे थे। भीड़ बेकाबू हुई, कई घायल हुए और महिलाओं के पैर टूटे।

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मद्रासी OTT रिलीज़: सिनेमाघरों से घर-घर तक की यात्रा

तमिल सिनेमा की बहुप्रतीक्षित फिल्म “मधरासी” ने जब 5 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में दस्तक दी, तो दर्शकों के बीच मानो बिजली-सी दौड़ गई। निर्देशक ए.आर. मुरुगदॉस और अभिनेता सिवकार्तिकेयन की इस अनोखी जोड़ी ने एक ऐसा मनोवैज्ञानिक एक्शन थ्रिलर रचा, जिसने थिएटर में बैठे दर्शकों को हर मिनट कुर्सी से चिपकाए रखा। अब यही फिल्म एक नए पड़ाव की ओर बढ़ रही है—OTT प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़। यह वह सफ़र है जहाँ पर्दे का जादू अब मोबाइल और टीवी स्क्रीन तक पहुँचने वाला है। सिनेमाघरों का जुनून रघु नामक किरदार, जो मानसिक असामान्यताओं से जूझते हुए भी हथियारों की तस्करी करने वाले माफिया के खिलाफ खड़ा होता है, दर्शकों को न सिर्फ रोमांचित करता है बल्कि सोचने पर भी मजबूर करता है। 168 मिनट लंबी इस फिल्म ने एक्शन, सस्पेंस और भावनाओं के बीच ऐसी डोर बुनी कि दर्शक तालियों और सीटियों से थिएटर गूँजा उठे। थिएटर से निकलने वाले हर दर्शक के चेहरे पर एक ही सवाल था—अब यह फिल्म घर बैठे कब देख पाएँगे? और इसी सवाल का जवाब अब मिलने वाला है। OTT पर धमाका फिल्म मधरासी के डिजिटल अधिकार अमेज़न प्राइम वीडियो ने खरीदे हैं। यह फिल्म थिएटर के एक महीने बाद यानी 1 अक्टूबर 2025 को OTT पर रिलीज होगी। कुछ रिपोर्ट्स इसे 3 अक्टूबर भी मानती हैं, लेकिन इतना तय है कि अक्टूबर की शुरुआत में दर्शक इसे अपने घरों में देख सकेंगे। यह फिल्म न सिर्फ तमिल में बल्कि हिंदी, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ डब संस्करणों में भी उपलब्ध होगी। यानी भाषा की दीवार तोड़े बिना हर दर्शक इस रोमांचक सफ़र का हिस्सा बन सकेगा। पर्दे से स्क्रीन तक—एक अतिकाल “मधरासी” का सफ़र केवल एक फिल्म का सफ़र नहीं है, बल्कि यह सिनेमा के बदलते स्वरूप का भी प्रतीक है। पहले यह कहानी बड़े पर्दे पर उतरी, जहाँ सैकड़ों आँखें अंधेरे हाल में एक साथ इसे देख रही थीं। वहाँ हर एक्शन सीन पर सीटी बजती थी, हर इमोशनल मोड़ पर सन्नाटा छा जाता था। अब वही कहानी एक और यात्रा पर निकल पड़ी है—OTT की। यहाँ दर्शक अकेले या परिवार संग, घर की आरामदायक कुर्सी पर बैठकर इसे देखेंगे। यहाँ तालियाँ और सीटियाँ नहीं होंगी, लेकिन कहानी का असर वही होगा—दिल की धड़कनों में तेज़ी, आँखों में चमक और दिमाग में रहस्य की गुत्थी। दर्शकों की उम्मीदें OTT पर आने से “मधरासी” और भी व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुँचेगी। जो लोग थिएटर नहीं जा पाए, वे अब इसे आसानी से देख सकेंगे। साथ ही, फिल्म के एक्शन और सस्पेंस दृश्यों को बार-बार देखने का विकल्प भी मिलेगा। यह OTT रिलीज़ फिल्म के लिए दूसरी पारी साबित हो सकती है, जो बॉक्स ऑफिस से कहीं आगे तक जाएगी। मधरासी केवल एक तमिल फिल्म नहीं है, बल्कि यह आज के सिनेमा की बदलती तस्वीर का प्रतीक है। थिएटर से निकलकर जब यह फिल्म OTT पर पहुँचेगी, तो यह दिखाएगी कि असली जादू पर्दे का नहीं, कहानी का होता है। और अच्छी कहानियाँ हर प्लेटफ़ॉर्म पर अपना असर छोड़ जाती हैं। BY SHRUTI KUMARI

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